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रमजान आज से, सज गए बाजार

Bareilly

Updated Sun, 22 Jul 2012 12:00 PM IST
बरेली। रविवार को रमजान का पहला दिन है। इस मुबारक महीने की शुरुआत होने से पहले जगह-जगह मस्जिदों में शनिवार रात रोशनी बिखरी हुई नजर आई। रात पौने नौ बजे से मस्जिदों में तरावीह का दौर भी शुरू हो गया, जो महीने के हर रोज होगी। इससे पहले दिन में रोजेदार सहरी और इफ्तार के लिए चीजें खरीदने में लगे रहे।
चांद की शहादत होने की उम्मीद में शुक्रवार रात ही लोग घरों से तरावीह के लिए तैयारी करके निकले थे। बाद में जब पता चला कि शहादत न होने की स्थिति में रमजान रविवार से होगा तो उनका एक दिन का इंतजार और बढ़ गया। रमजान के एक दिन पहले शुरू होने वाली तरावीह को इशा की नमाज के बाद पढ़ा जाता है। शनिवार को तमाम मस्जिदों को रौशनी से नहला दिया गया। कुतुबखाना चौराहा के पास वाली मस्जिद की मीनार को भी सफेद रोशनी से नहलाया गया। यह दूर से देखते ही बन रही है। रात होते-होते तक हर कोई तरावीह के लिए भागदौड़ में लगा था। सैलानी, जगतपुर, कांकर टोला, शहामतगंज, मलूकपुर, जामा मस्जिद, बाजार संदल खां, किला जैसे इलाकों में दिन में तो बाजार सजे हुए नजर ही आए, रात को भी खूब रौनक दिखाई दी। दिन में लोग खजला, फैनी, मीठी रोटी, खजूर खरीदते हुए नजर आए। जगह-जगह खजला, फैनी और मीठी रोटी की छोटी-छोटी दुकानें नजर आईं तो सड़क किनारे ठेलों पर भी इनकी खूब बिक्री हुई।
महंगे हो गए खजला और खजूर भी
पिछले रमजान के मुकाबले इस बार महंगाई का असर खजला, खजूर आदि पर भी दिखाई दिया। जहां खजला और खजूर पिछले साल 60 से 65 रुपये प्रतिकिलो बिका था, वहीं इस बार यह 80 रुपये पर जाकर रुका। विभिन्न ब्रांड के खजूर 80 रुपये किलो बिका, पिछली दफा यह 60 रुपये था। महंगाई को देखते हुए इस बार कंपनियों ने ढाई-ढाई सौ ग्राम की पैकिंग भी तैयार की है। स्वाद और मुलायमियत समेटे खास खजूर 150 रुपये तक का बाजार में है। इफ्तारी के वक्त ज्यादा खपत कचरी-पापड़ की होती है, इस पर महंगाई का उतना असर नहीं पड़ा है। यह इस बार 45 रुपये प्रतिकिलो या उसके आसपास ही बिक रहे हैं।


शनिवार की शाम से लोगों ने बड़े उत्साह के साथ नमाजे तरावीह शुरू की। तरावीह की नमाज रमजान का चांद देखने के बाद से शुरू कर दी जाती है। सिर्फ रमजान शरीफ में ही पढ़ी जाने वाली इस बीस रकात नमाज को तरावीह कहतें हैं जोकि रोजाना इशा की नमाज के बाद पढ़ी जाती है और ईद का चांद देखने के बाद पढ़ना खत्म कर दी जाती है। नामजे तरावीह को पुरूष मस्जिदों में जमात के साथ पढ़ते हैं और औरतें घरों में खुद ही इस नमाज को अदा करती हैं। मस्जिदों में तीस दिन तक इस नमाज में इमाम साहब रोजाना कुरान पाक का क्रमानुसार एक पारा सुनाते हैं।
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