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आधी लड़ाई तो पहले ही जीत चुके थे डॉ. तोमर

Bareilly

Updated Sun, 08 Jul 2012 12:00 PM IST
इमेज फैक्टर ने आसान की राह, शहर के विकास के मुद्दे पर दूसरी पार्टियों के हिस्से के वोट भी मिले
- गुलशन को छोड़कर बाकी सभी प्रत्याशी जमानत तक नहीं बचा सके
- भाजपा के गढ़ माने जाने इलाके हों या पुराना शहर, सभी जगह ली बढ़त
बरेली। निर्विवाद व्यक्तित्व, साफ सुथरी छवि और पिछले कार्यकाल की उपलब्धियों ने डॉ. आईएस तोमर को एक बार फिर मेयर की कुर्सी तक पहुंचा दिया। रजनी शर्मा के चुनाव मैदान से हट जाने पर उनके खिलाफ 17 प्रत्याशी बचे, लेकिन भाजपा के गुलशन आनंद के अलावा सभी की जमानत जब्त हो गई।
मतगणना के शुरुआती रुझान से ही साफ हो गया कि चुनावी जंग की यह बाजी डॉ. आईएस तोमर के हाथ रहेगी। एक बार उन्होंने बढ़त हासिल की तो यह आखिर तक कामयाब रही। दोपहर एक बजे प्रत्याशियों के लिए बनाए गए पांडाल में बैठे गुलशन आनंद ने भी मान लिया कि इस समर का फैसला उनके पक्ष में नहीं आएगा। यह डॉ. तोमर की सीख का ही नतीजा था कि एक ही पांडाल में उनके और भाजपा के समर्थक बैठे थे, मगर बड़ी ही शाइस्तगी से एक दूसरे से बात कर रहे थे। कोई भाजपा के हार की वजह उसके मतदाता का बूथ तक न पहुंचना बता रहा था तो कोई बसपा समर्थित प्रत्याशी मो. फरहत लड़ाई में न जम पाना। लेकिन, सही बात तो यह है कि हर जाति, मजहब और वर्ग के समर्थन ने डॉ. तोमर को कामयाबी दिलाई। उनकी साफ सुथरी छवि ने का भी बहुत बड़ा योगदान रहा। यही कारण रहा कि भाजपा के गढ़ माने जाने वाले साहूकारा, बमनपुरी, भूड़ और गुलाबनगर जैसे पुराने मोहल्ले हों या पुराने शहर और बाकरगंज का इलाका, सभी जगह डॉ. तोमर बढ़त लिए दिखे।

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ऐसे हुई आसान कामयाबी
- सपा हाईकमान के समर्थन का दावा करने वाली रजनी शर्मा का मैदान से हटना
- सत्ताधारी सपा के ज्यादातर नेताओं के समर्थन में आने से शहर का विकास करा पाने की संभावना
- सभी जाति-धर्म के लोगों का समर्थन, मुस्लिम मतदाताओं का खासकर उनकी तरफ झुकाव
- हिंदू जागरण मंच के प्रदेश अध्यक्ष होने की वजह से गुलशन आनंद की कट्टर संघी छवि


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यह रहा मेयर पद की जंग का अंजाम
-डॉ. आईएस तोमर (निर्दलीय) 123211
- गुलशन आनंद (भाजपा) 81466
- मोहम्मद फरहत (बसपा समर्थित) 19152
- अमजद सलीम (कांग्रेस) 17957
कुल पड़े वोट: 2.82 लाख
हार जीत का अंतर: 41745


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मैंने शहर में बेहतर सफाई व सीवर व्यवस्था, अच्छी सड़कें और विकास कराने का वादा किया था, जीतने के बाद इन वादों के लिए ही समर्पित रहूंगा। आने वाले कुछ ही महीनों में लोग शहर में तब्दीली महसूस करने लगेंगे।-डॉ. आईएस तोमर


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लोकतंत्र में हार और जीत तो लगी ही रहती है। मैं सहर्ष जनादेश स्वीकार करता हूं। सभी कार्यकर्ताओं ने मुझे पूरी शिद्दत के साथ लड़ाया। हार के कारणों को खोजने का प्रयास करूंगा। -गुलशन आनंद
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