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स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने आयरन टेबलेट्स बांटकर निपटा दिया स्कूल हेल्थ प्रोग्राम

Bareilly

Updated Wed, 04 Jul 2012 12:00 PM IST

बच्चों की दवाओं के लिए आई रकम लौटा दी

स्कूल हेल्थ प्रोग्राम में 13 लाख का घोटाला
कार्यक्रम 15 ब्लॉक के 1050 स्कूल में चलना था


बरेली। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के दिलचस्पी न लेने की वजह से सरकारी बेसिक स्कूलों में बच्चों को सेहतमंद रखने की योजना नाकाम हो गई। इस योजना के तहत स्कूलों में बच्चों को सिर्फ एक बार आयरन की गोलियां बांटी गईं। दूसरी मदों में मिले लाखों रुपये की रकम में से कुछ को कागजों में ठिकाने लगा दिया गया और बाकी रकम उपभोग न हो पाना दिखाकर शासन को लौटा दी गई।
बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए उनके परीक्षण और जरूरी दवाएं देने की योजना राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य योजना (एनआरएचएम) का हिस्सा थी जिसका क्रियान्वयन स्कूल हेल्थ प्रोग्राम के नाम से होना था। इस प्रोग्राम के तहत स्कूलों में जाकर हर बच्चे को आयरन और डीवार्मिंग की गोलियां खिलाई जानी थीं। उनके स्वास्थ्य की पूरी जांच कर उनका हेल्थ कार्ड बनाया जाना था। कार्यशालाओं का आयोजन होना था। स्कूलों में बच्चों का वजन नापने और आंखों की जांच करने के लिए मशीनें मुहैया कराई जानी थीं। हर स्कूल में दो शिक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया जाना था ताकि वे बाद में बच्चों के स्वास्थ्य का ख्याल रख सकें। यह सारी जिम्मेदारी सरकारी अस्पतालों के मे़िडकल ऑफिसर के साथ एएनएम और फार्मासिस्ट को दी गई थी। अफसरों को इस प्रोग्राम की निगरानी करनी थी। शासन ने निर्देश दिया था कि सत्र 2011-12 में दो बार यह प्रोग्राम अनिवार्य रूप से चलाया जाए, लेकिन अफसरों ने इसमें बिल्कुल दिलचस्पी नहीं ली।
स्कूलों में इस प्रोग्राम के तहत सिर्फ एक बार आयरन की गोलियां बांटी गईं। यह काम भी सत्र के बिल्कुल आखिर में हुआ। डीवार्मिंग की गोलियां खरीदने के लिए शासन से आठ लाख मिले थे, लेकिन ये गोलियां खरीदी ही नहीं गईं। बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनके हेल्थ कार्ड बनाने और वर्कशाप के आयोजन जैसे काम भी नहीं हुए। इस मद में जारी हुई साढ़े पांच लाख रुपये की रकम कागजों में ही ठिकाने लगा दी गई। सीएमओ से इस बारे में पूछने पर उन्होंने हैरान करने वाला जवाब दिया। बोले, प्रोग्राम चल रहा है और हमारी टीमें लगातार स्कूलों में जा रही है। उनसे पूछा गया कि स्कूल तो बंद हैं। इसके बाद कोई जवाब नहीं मिला।

शासन के निर्देश के मुताबिक कार्यक्रम को चलाया गया। डीवार्मिंग की गोलियों के लिए हमें कोई रकम नहीं मिली। हमें इसके लिए सीएमओ की ओर से मेडिकल एड के तौर पर भी कोई आर्थिक मदद नहीं मिली। -डॉ. एसपीएस सिद्धू, एनआरएचएम के नोडल अधिकारी

स्कूल हेल्थ प्रोग्राम चल रहा है। डी वार्मिंग की दवाएं नहीं आईं थीं। हमने मेडिकल एड से गोलियां खरीदीं और उन्हें स्कूलों में बंटवाया भी गया था। - डॉ. एके त्यागी, सीएमओ

दो साल से यह कार्यक्रम चल रहा है, लेकिन स्कूलों में स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम नहीं आई, न स्कूलों में फर्स्ट एड बॉक्स दिए गए हैं। बच्चों के स्वास्थ्य की जांच भी नहीं की गई, न उन्हें कोई दवा खिलाई या बांटी गई। -हरीश बाबू, प्राथमिक शिक्षक संघ के नेता

सत्तर का चश्मा दो सौ में खरीदना चाहते थे अफसर
फर्जी बिल नहीं बने तो वापस की रकम

एनआरएचएम के तहत जिला अंधता निवारण समिति को जरूरतमंद बच्चों के लिए चश्मा खरीदने को दो लाख रुपये दिए गए, लेकिन इस काम में सरकारी और मार्केट रेट का अंतर आड़े आ गया। सरकारी रेट 200 रुपये का था और बाजार भाव 70 रुपये का। 70 रुपये के चश्मे का सरकारी रेट पर बिल नहीं बन पाया तो चश्मों की खरीद ही नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि दो लाख रुपये लैप्स हो गए। इसके अलावा वजन नापने वाली मशीनें, आंखों की जांच करने वाला उपकरण और लंबाई की माप करने वाले उपकरण की खरीद के लिए आए 1.5 लाख रुपये भी लैप्स हो गए, क्योंकि बाजार भाव कम था। इस सबके पीछे एनआरएचएम में चल रही कैग की जांच का डर भी एक वजह रहा।

स्कूल हेल्थ प्रोग्राम

दवाओँ का बजट: आठ लाख
हेल्थ कार्ड, रजिस्टर और वर्कशॉप : 5.40 लाख
ब्लॉक : 15
कुल स्कूल : 1050
कुल बच्चे : 2.25 लाख
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