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लग्जरी गाड़ियों में प्रयोग हो रही रसोई गैस

Bareilly

Updated Mon, 25 Jun 2012 12:00 PM IST

अयूब खां चौराहे के पास खुलेआम चल रहा रिफलिंग का अवैध धंधा

एलपीजी : रसोई के लिए किल्लत, कारों के लिए इफरात
कारों में रसोई गैस भरने के कई अवैध ठिकाने
संजय श्रीवास्तव
बरेली। कई इलाकों में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों से कारों में गैस भरने का अवैध धंधा चल रहा है। इसे रोकने की जिम्मेदारी जिनके ऊपर है, वे सब कुछ जानते हुए भी चुप हैं। नतीजतन, इसका खामियाजा सीधे साधे उपभोक्ता भुगत रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपनी रसोई के लिए एक सिलेंडर मिलने के कम से कम 35-40 दिन बाद दूसरा सिलेंडर मिल पाता है।
रविवार की दोपहर करीब दो बजे का समय होगा। सिविल लाइंस में अयूब खां चौराहे के पास टैक्सी स्टैंड के बराबर में एलन क्लब के सामने तमाम घरेलू सिलेंडर रखे थे। इनमें कुछ सिलेंडर इंडेन के थे तो कुछ हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपी) के। यहां चार-पांच लोग एक मशीन के जरिए सिलेंडरों की गैस लग्जरी कारों के फ्यूल टैंक में भर रहे थे। आसपास के लोगों ने बताया कि गैस रिफलिंग का यह अवैध धंधा पिछले कई महीनों से चल रहा है।
यहां स्थिति यह थी कि तीन चार लड़के साइकिलों से भरे सिलेंडर पहुंचाने में लगे थे। वापसी में वही लड़के खाली सिलेंडर साथ ले जा रहे थे। रिफिलिंग करने वाले एक व्यक्ति ने अपना नाम रामकुमार निवासी गंगापुर और अपने साथी का नाम राजीव निवासी कालीबाड़ी बताया। रामकुमार की मानें तो वह ब्लैक में गैस सिलेंडर 500-550 रुपये में खरीदता है। घरेलू सिलेंडर की गैस कार में रिफिल करने के बदले 670-700 रुपये लेते हैं। यानी, एक सिलेंडर पर दो सौ रुपये तक बच जाते हैं। एक घंटे में रामकुमार और उसके साथी ने 10-15 कारों में गैस भरी। रामकुमार के मुताबिक, वह यह अवैध धंधा करीब एक साल से कर रहा है। धंधा कोतवाली की सिविल लाइंस चौकी पुलिस की मिलीभगत से चलता है। बदले में पुलिस वाले हर महीने रुपये लेते हैं। जिला पूर्ति कार्यालय और अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों की सांठगांठ भी इनसे बताई जाती है।
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यह है अवैध कारोबार का अर्थशास्त्र
पंप पर एक लीटर एलपीजी के दाम 45.44 रुपये है। यानी, यहां से गैस भराने पर एक किलोग्राम गैस का दाम हुआ 80.36 रुपये। जबकि ‘घरेलू’ एलपीजी की कीमत प्रति किलोग्राम 28.07 रुपये है। वाहनों में अवैध रूप से गैस भरने वाले इसे 47-48 रुपये प्रति किलोग्राम तक दे देते हैं। इस अंतर के के चलते ही शहर में बड़े पैमाने पर घरेलू सिलेंडरों से वाहनों में गैस भरने का अवैध धंधा चल रहा है।

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असली कर्ताधर्ता कोई और
रामकुमार का कहना है कि राजीव की पार्टनरशिप में वह यह धंधा करता है। हालांकि, राजीव खुद को टैक्सी चालक बता रहा था। सूत्रों की मानें तो इस अवैध धंधे के पीछे कोई दबंग और रसूख वाला है। रामकुमार ने डर की वजह से उसके नाम का खुलासा नहीं किया।
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कई जगह चलता है रि-फिलिंग का अवैध धंधा
पीलीभीत बाईपास रोड पर तिरंगा होटल के पास एक दुकानदार घरेलू सिलेंडरों से एलपीजी किट लगी गाड़ियों में गैस रिफिल करता है। पिछले महीने उसके घर में चोरी के सिलेंडर बरामद हुए थे। थाना बारादरी पुलिस ने उसको पकड़ा भी था। उसके गैस रिफिल का अवैध धंधा करने की जानकारी पुलिस को दी गई थी। मगर, पुलिस ने केवल चोरी के सिलेंडर बरामद दिखाकर कार्रवाई पूरी मान ली। सैटेलाइट के पास ही सीएनजी पंप के ठीक बराबर वाली गली में गैस रिफलिंग का धंधा चल रहा है। मढ़ीनाथ चौकी के पास भी यह धंधा चल रहा है। इनके अलावा भी शहर में तमाम ऐसे स्थान हैं, जहां गैस रिफिलिंग का अवैध कारोबार हो रहा है।
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आम लोगों को करना पड़ता है लंबा इंतजार
घरेलू गैस की बुकिंग उपभोक्ता अपनी जरूरत के हिसाब से कभी भी करा सकता है। मगर, डिलीवरी के 21 दिन बाद ही दूसरे सिलेंडर की बुकिंग की जाती है। बुकिंग के 12-17 दिन बाद ही ही गैस मिल पाती है। मतलब, एक सिलेंडर मिलने के 33 से 38 दिन बाद ही दूसरा सिलेंडर मिल पाता है।

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चुप्पी साध गए डीएसओ
जिलापूर्ति अधिकारी (डीएसओ) खुलेआम हो रहे गैस रिफलिंग के अवैध धंधे और उनके खिलाफ कार्रवाई के बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। खुद के बचाव में इतना ही कहा कि टीम गठित कर कार्रवाई की जाएगी। कब तक कार्रवाई होगी? इस सवाल पर वह चुप्पी साध गए।
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कई बार की शिकायत
बरेली एलपीजी गैस वितरक एसोसिएशन की अध्यक्ष रंजना सोलंकी ने बताया कि कारों में गैस रिफलिंग और घरेलू सिलेंडरों का व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल किए जाने की शिकायत कई बार की गई। मगर, डीएसओ की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पिछले महीने 17 से 24 मई के बीच चले अभियान में भी किसी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
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