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सुबह ही नेता खटखटा देते हैं इमाम और तौफीक भाई को

Bareilly

Updated Thu, 07 Jun 2012 12:00 PM IST
बरेली। आसपास कोई शुभ काम हो और तौफीक-इमाम शाह की जोड़ी को याद न किया जाए, ऐसा हो ही नहीं सकता। पुराने शहर में पंजाबी भांगड़ा बैंड मास्टर के नाम से जाने जाते हैं दोनों। चुनावी सीजन में नेता उनके दरवाजे पर सुबह ही दस्तक दे देते हैं और जब ऐसा नहीं होता तो वे ही नेताओं के घरों और दफ्तरों के बाहर खड़े हो जाते हैं। पिछले छह दिन ये जोड़ी तमाम नामांकन जुलूसों का हिस्सा बनी। उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि जिसके लिए भांगड़ा बैंड बजा रहे हैं, वो कौन हैं। बस, एक ही कोशिश रहती है कि जब भांगड़ा धुन निकालें तो लोग थिरकने से खुद को न रोक सकें।
कांकर टोला के रहने वाले मो. तौफीक को उनके जानने वाले ‘सूखा भाई’ के नाम से बुलाते हैं। बुधवार को वह अपने साथी जोगी नवादा के इमाम शाह के साथ वार्ड 46 के शिवसेना के प्रत्याशी मिश्री लाल कश्यप का नामांकन कराने अर्बन हाट पहुंचे। प्रत्याशी और उनके कुछ समर्थक नामांकन चलाने अंदर चले गए और इसके साथ ही उनका काम खत्म हो गया। विकास भवन के सामने ही डॉ. आईएस तोमर के दफ्तर पर दोनों पहुंचे, मगर बुधवार को इनका वहां कोई काम नहीं था। इसलिए दोनों दोस्त डीएफओ के दफ्तर के बाहर छाया में खड़े हो गए। इस इंतजार में कि कोई आएगा और फिर उन्हें ढोल बजाने का ऑर्डर देगा।
मो. तौफीक बताते हैं कि अब उन्हें हर सीजन में काम मिल जाता है। चूंकि, चुनाव के समय नेता थोड़ा ज्यादा मेहनताना दे देते हैं, इसलिए उनके लिए काम करना ज्यादा पसंद करते हैं। कहते हैं, पिछले बीस सालों में न जाने कितने प्रत्याशियों के नामांकन जुलूसों में ढोल बजा चुके हैं। हर बार चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही वे पता कर लेते हैं कि नामांकन कब से कब तक होगा और नतीजे कब आने वाले हैं, क्योंकि इन्हीं दिनों में सबसे ज्यादा काम मिलता है। 31 मई से छह जून के बीच नगर निगम चुनाव के लिए नामांकन कराने वालों ने अगर पहले से बता दिया तो उनके ठिकानों पर समय से पहुंच गए और जब ऑर्डर नहीं मिला तो नेताओं के घरों या दफ्तरों के बाहर आ जाते। इस तरह से उन्हें जरूरत भर का काम मिल जाता है। इमाम शाह ने माना कि वह नहीं चाहते उनके बच्चे यह काम करें, क्योंकि वह उन्हें पढ़ा लिखाकर किसी अच्छी नौकरी पर लगाना चाहते हैं।
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