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यूपी में भी जांच और दवाएं मुफ्त हों

Bareilly

Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
विश्व थैलीसीमिया दिवस कल
एम्स में हेमोटोलॉजी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. वीपी चौधरी का सुझाव
सिटी रिपोर्टर
बरेली। देश के पांच करोड़ लोगों में लाइलाज थैलीसीमिया के लक्षण हैं। यह बीमारी जेनेटिक है और मां बाप से बच्चे में आती है। बरेली और आसपास के क्षेत्रों में इसके मरीजों की संख्या में हर साल वृद्धि हो रही है। इस संख्या में चार नए मरीजों का इजाफा हुआ है। आईएमए में थैलीसीमिया सोसाइटी ने कैंप का आयोजन किया। इसमें बरेली, रामपुर, रुद्रपुर, काशीपुर, शाहजहांपुर और पीलीभीत के मरीज बच्चे और उनके अभिभावक पहुंचे।
एम्स में हेमोटोलॉजी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. वीपी चौधरी का मानना है कि लोगों में जागरूकता की कमी है। इसलिए मरीजों की संख्या बढ़ रही है। दिल्ली सरकार ने अपने यहां सरकारी अस्पतालों में थैलीसीमिया की जांच और दवाएं मुफ्त में वितरित करना शुरू कर दिया है। यूूपी सरकार को चाहिए कि इस लाइलाज बीमारी के प्रति गंभीरता दिखाए और जिला अस्पतालों में इसकी जांच और दवाओं को मुफ्त कर दें। उन्होंने कहा कि अगर विवाह से पहले लड़की और लड़का रोग के लक्षणों की जांच करा लें तो काफी हद तक इस पर रोक लगाई जा सकती है। बीमारी का लक्षण आठ महीने से लेकर दो साल के बीच लग जाता है। अगर शादी के पहले इस रोग का पता चल जाए तो बेहतर है। स्कूल कालेजों में इसका प्रचार प्रसार कर जन जागरूकता लाई जा सकती है। थैलीसीमिया सोसाइटी की प्रमुख डॉ. जेएस सरदाना ने बताया कि कैंप में अस्सी से ज्यादा मरीजों को देखा गया। हमारी कोशिश है कि इस घातक बीमारी पर रोक लगे।
चार नए मरीज रजिस्टर्ड
डॉ. जेएस ने सरदाना ने बताया कि बिजनौर से अरविंद सिंह के 11 माह के बेटे मयंक, किच्छा के मोहनस्वरूप के बेटे सात वर्षीय रजत, पिथौरागढ़ के किशन सिंह के बेटे 13 वर्षीय मोहित और काशीपुर के नरेश के बेटे ढाई साल के संयम। यह चार मरीज इस बार नए रजिस्टर किए गए हैं।
क्या है थैलीसीमिया
डॉ. वीपी चौधरी ने बताया कि खून की अत्यधिक कमी, जिसको किसी भी दवा या इंजेक्शन से ठीक नहीं किया जा सकता। इसमें जिंदगी भर खून चढ़वाना पड़ता है। हीमोग्लोबिन पूरा नहीं बनता। जिससे पीलापन, आयु के अनुसार शरीर न बढ़ना, जिगर, तिल्ली और हृदय का आकार बढ़ जाता है। इसका कोई इलाज नहीं है। दो सप्ताह में खून चढ़ाना पड़ता है और 50 हजार से दो लाख तक की दवाएं करानी पड़ती हैं।
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