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राहत के नाम पर खानापूर्ति, बाढ़ पीड़ित बेहाल

Barabanki

Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
बाराबंकी। दस दिन से खतरे के निशान से ऊपर बह रही घाघरा की चपेट में आए दो दर्जन गांव पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं। सैकड़ों घर नदी में बह गए और सात हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि पर खड़ी फसल नष्ट हो गई। ऐसे में बाढ़ से बर्बाद हुए लोगों को राहत के नाम पर प्रशासन महज खानापूर्ति कर रहा है। जिससे कि बाढ़ पीड़ित परिवारों की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
मालूम हो कि 3/4 अगस्त की रात घाघरा एल्गिन ब्रिज पर खतरे का निशान पार कर गई थी। नदी के बढ़ते जलस्तर ने जिले की सिरौलीगौसपुर तहसील के मांझा रायपुर, परसावल, नैपुरा, बेहटा, पारा तथा रामसनेहीघाट तहसील के कमियार गांव पूरी तरह से डूब गए थे। छह अगस्त को जलस्तर और बढ़ने से रामनगर तहसील के खुज्जी, बिघौली, जमका, पूरनपुर, परसरामपुर, रैकोलवा, फाजिलपुर, नरौली, कुशवातासपुर, कुसौरा, तमस्सेपुर, रतनपुर, कुड़ीन, कंचनापुर, हेतमापुर, पर्वतपुर, पुरैना व अशरफपुर गांव जलप्लावन से प्रभावित हुए थे। इन गांवों के करीब चार हजार परिवार बेघर हो गए। ये लोग तटबंधों व ऊंचे स्थानाें पर गुजर-बसर कर रहे हैं। प्रशासन से मिले राशन से किसी तरह पेट भर रहे इन परिवारों का बुरा हाल है। बाढ़ प्रभावित इलाके की हालत ये है कि जब कोई आला अधिकारी आता है तो मातहत भी सक्रिय हो जाते हैं और उनके जाने के बाद सब लौट जाते हैं। तीन दिन की छुट्टी होेने के कारण बाढ़ प्रभावित इलाके में कोई भी अधिकारी, कर्मचारी पीड़ितों का हाल लेने नहीं गया। सोमवार को प्रभावित क्षेत्रों में डीएम के निरीक्षण की खबर पाकर अधिकारी सक्रिय हुए। जिसके बाद पशुओं के चारे का इंतजाम शुरू हुआ।
घाघरा की कटान से प्रभावित हो रहा परसावल के पास बांध का मरम्मत कार्य भी सोमवार को शुरू किया गया। डीएम के पहुंचने तक बोरियां डालकर बचाव कार्य शुरू करा दिया गया।
डीएम मिनिस्ती एस. ने सोमवार दोपहर एसडीएम सिरौलीगौसपुर और सीएमओ के साथ परसावल, कमियार समेत कई गांवों का निरीक्षण कर बाढ़ पीड़ितों से राहत सामग्री के बारे में जानकारी ली। ग्रामीणाें ने डीएम को बताया कि चारे की दिक्कत है। नाव से गन्ने की फसल काटकर लाकर पशुओं को खिला रहे हैं। टीकाकरण और दवाएं मिलने की बात लोगों ने स्वीकार की। सोमवार को बेहटा की बाढ़ चौकी गौरा में प्रति परिवार 20 किलो आलू व दो मच्छरदानी का वितरण किया गया।
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