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ठेकेदार ने कटवा डाले आम के फलदार पेड़

Barabanki

Updated Wed, 13 Jun 2012 12:00 PM IST
कोठी (बाराबंकी)। पुलिस और वन विभाग के साथ ठेकेदारों की मिलीभगत से क्षेत्र में हरे पेड़ों की धड़ल्ले से कटान की जा रही है। इसका एक उदाहरण मंगलवार को उस समय दिखा जब मोहम्मदपुर हुसैन बख्श गांव में ठेकेदार ने वन दरोगा की अनुमति से फलदार आम के पेड़ों को कटवा डाला। जबकि इसी बाग के मालिक किसान ने जब वन दरोगा से यह कहकर अनुमति मांगी कि उसे दो सूखे पेड़ कटवाने हैं तो वन दरोगा ने साफ मना कर दिया। अपनी फरियाद लेकर पहुंचे किसान ने ठेकेदार से संपर्क किया तो उसे तत्काल अनुमति दे दी गई। इसके बाद मंगलवार को ही फलदार आम के पेड़ों को ठेकेदार ने कटवा डाला। क्षेत्र के मोहम्मदपुर हुसैन बख्श निवासी परमेश्वर पुत्र चौहान अपनी बाग में लगे आम के पेड़ों को कटवाना चाहता था। जिसके लिए उसने क्षेत्र में तैनात वन दरोगा लक्ष्मण सिंह से संपर्क किया तो उन्होंने पेड़ों के कटाने की अनुमति दिए बिना ही उसे वापस कर दिया। जबकि इसी बाग के मालिक किसान ने जब वन दरोगा से यह कहकर अनुमति मांगी कि उसे दो सूखे पेड़ कटवाने हैं तो वन दरोगा ने साफ मना कर दिया। अपनी फरियाद लेकर पहुंचे किसान ने ठेकेदार से संपर्क किया तो उसे तत्काल अनुमति दे दी गई। इसके बाद ठेकेदार ने इन पेड़ों पर आरे चलवा दिये और हरे-भरे पेड़ हमेशा के लिए जमीन से जुदा कर दिये गए। यह घटना दर्शाती है कि किस कदर क्षेत्र में हरे पेड़ों पर वन विभाग और पुलिस की लकड़कट्टों से आपसी सांठगांठ के साथ आरा चलाया जा रहा है। वहीं बैठकों में पर्यावरण संरक्षण का ढिंढोरा पीटकर पौधरोपण और इनके संरक्षण का ढोंग किया जाता है। जबकि अफसरों का असली मकसद तो किसी भी तरह से अपनी जेबें भरना होता है। इसको फायदा उठा रहे लकड़ी माफिया जंगल से लेकर हरे-भरे बाग तक उजाड़ने में कोई कोताही नहीं बरत रहे हैं। इससे पूर्व तपापुर गांव में महुआ के हरे पेड़ों को सूखा दिखाकर कटान का परमिट दिया गया। दो सप्ताह पूर्व रायपुर गांव में विभाग ने ठेकेदारों की मिली भगत से आम और इमली के हरे पेड़ कटवा दिए। इस संबंध में वन दरोगा लक्ष्मण सिंह से जब पूछा गया तो उनका जवाब तो और भी चौंकाने वाला था, वे बोले कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ही पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई है। इसका मतलब वन दरोगा से ऊपर के अफसरों की भी हरे पेड़ों की कटान में सहमति थी।
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