आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

डेढ़ दशक में आधा हो गया धान का रकबा

Banda

Updated Tue, 28 Aug 2012 12:00 PM IST
बांदा। धान की खेती के लिए मशहूर अतर्रा क्षेत्र में धान का रकबा लगातार घटता जा रहा है। डेढ़ दशक में धान का रकबा घटकर 50 फीसदी रह गया। कई साल से सूखे की मार और केन नहर प्रणाली की बदहाली इसके लिए जिम्मेदार है।
जिले में सबसे ज्यादा धान की खेती अतर्रा क्षेत्र में की जाती है। इससे जुडे़ नरैनी क्षेत्र के कुछ हिस्से में भी धान की खेती होती है। डेढ़ दशक पहले यहां 91 हजार 301 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती होती थी, जो घटते-घटते 55 हजार हेक्टेयर पर आ गई है। इस साल जुलाई में पर्याप्त बारिश न होने से यह रकबा भी कम हो गया है। वर्ष 1998 के बाद धान की खेती में सबसे ज्यादा गिरावट आई। वर्ष 2001 में 68 हजार 512 हेक्टेयर में धान की रोपाई की गई थी। वर्ष 2002 और 2003 में 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल पर धान की रोपाई की गई। वर्ष 2004-05 में 61 हजार 888 हेक्टेयर में धान का उत्पादन हुआ।
वर्ष 2005-06 में सूखे की मार ने धान उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी। बमुश्किल 43 हजार 413 हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो पाई। 2006-07 में भी किसान पानी की किल्लत से उबर नहीं पाए। बारिश कम होने और नहर पूरी क्षमता से न चलने से 52 हजार 830 हेक्टेयर उत्पादन लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया। मात्र 45 हजार हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो पाई। वर्ष 2009-10 धान उत्पादक किसानों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण रहा। मौसम की मार और समय से नहर न चल पाने से 50 फीसदी किसान धान की नर्सरी भी तैयार नहीं कर पाए। चालू वित्तीय वर्ष में कृषि विभाग ने 55 हजार 840 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया। जुलाई में बारिश न होने से लक्ष्य पर शुरुआती ग्रहण लग गया था। धान की बेड़ तैयार न होने से अधिकांश किसान रोपाई नहीं कर पाए। अब तक मात्र 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई हो पाई है।
प्रगतिशील किसान हेमंत तिवारी का कहना है कि धान का रकबा घटने के साथ स्थानीय उच्च गुणवत्ता वाली प्रजातियों की खेती अब गिने-चुने किसान ही करते हैं। चिन्नावर, तुलसी भोग, रामभोग, परसन बादशाह, मुस्कन, काला शिवदास आदि प्रजातियों के धान की खुशबू दूर तक फैलती थी। देशी धान फूल बिरंगी, शक्कर, रामकरौनी, बाबा धान, लुढ़कन, बताखी, भैसलोट आदि भी ढूंढे नहीं मिलते। कृषि प्रतिक्षेत्र अधिकारी अतर्रा लेखराज निरंजन का कहना है कि वर्तमान में किसान पंत-12, पंत-10, सोनम, नरेंद्र-359 और 97 प्रजातियाें के बीज ज्यादा खरीद रहे हैं। मौसम की बेरुखी और समय से नहर न चल पाना किसान धान की पैदावर में गिरावट की प्रमुख वजह बताते हैं।


  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

शरद से ब्रेकअप के बाद टूट गई थी दिव्यांका, इस एक्टर ने बदल दी जिंदगी

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

फिल्में न होने के बावजूद करोड़ों की मालकिन हैं रेखा, लाइफस्टाइल देख होगी जलन

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

इस नक्षत्र में जन्मे लोग आम और आंवले के पेड़ से रहें दूर, फायदे में रहेंगे

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

गॉडफादर न होने पर क्या होता है, कोई इस हीरोइन से पूछे! पहली फिल्म में कुछ यूं हुई थी बेबस

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

ईद पर सलमान खान से लेकर शबाना आजमी के घर बनता है ये लजीज खाना

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

Most Read

ईद पर शबाना के SMS से DM का दिल पसीजा, तोहफे में दी ईदी

Eid Mubarak Shabana sent SMS to Varanasi DM, got Idi in gift
  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

मारा गया कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल, देर रात हुआ एनकाउंटर

gangster anandpal encountered by rajasthan police
  • रविवार, 25 जून 2017
  • +

अखिलेश ने उठाए सवाल, पूछा-ईदगाह पर क्यों नहीं आए सीएम योगी

akhilesh yadav questions why CM yogi did not visit Eidgah on Eid.
  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

हरियाणा से मिला सुराग और फिर यूं चला एनकाउंटर आॅपरेशन

gangster  anandpal singh full encounter update
  • रविवार, 25 जून 2017
  • +

आनंदपाल एनकाउंटर पर सवाल, ये दे रहे है दलीलें

question raised over gangster anandpal singh encounter
  • रविवार, 25 जून 2017
  • +

आनंदपाल एनकाउंटर: जीता था शाही लाइफ और करता था दाउद को फॉलो

anand pal singh's lifestyle
  • रविवार, 25 जून 2017
  • +
Live-TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top