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बैंक व साहूकारों के कर्जों ने बढ़ाई बेचैनी

Banda

Updated Fri, 27 Jul 2012 12:00 PM IST
बांदा। बुंदेलखंड में कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की आत्महत्याओं अक्सर चर्चा में रहते हैं। मौसम की मार झेल रही फसलें किसानों को कई सालों से दगा दे रही हैं। किसान फसल में आने वाली लागत तक नहीं निकाल पा रहे। ऊपर से शादी-ब्याह व महंगे हुए घरेलू खर्च ने बहुतों को कर्जदार बना दिया है। ऐसे में किसानों के घर वसूली को दस्तक दे रहे राजस्व कर्मी उनकी नींद उड़ा रहे हैं। हालांकि जिला प्रशासन वसूली की बात सिरे से खारिज कर रहा है।
बुंदेलखंड के किसान करीब पांच सालों से सूखा अन्य कुदरती आपदाओं की मार झेल रहे हैं। सिंचाई संसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था न होने से कई सालों से फसलों में आने वाली लागत तक नहीं निकल पा रही है। ऐसे में बैंकों व साहूकारों का कर्ज चुकाना उनके लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। शादी-ब्याह का खर्च कर्ज लेकर निपटा रहे हैं। जिले में सैकड़ों किसान ऐसे हैं जो पांच-पांच साल से कर्ज नहीं जमा कर पा रहे। ऐसे में साहूकारों व राजस्व कर्मियों का दबाव उन्हें मानसिक उलझन दे रहा है। अतर्रा निवासी किसान बृज बिहारी इसी कर्ज के उलझन में परेशान हैं। उन्होंने बताया कि स्टेट बैंक से क्रेडिट कार्ड के जरिए उन्होंने डेढ़ लाख रुपया ले रखा है। सोचा था इस साल कुछ जमा कर देंगे, लेकिन फसल ने दगा दे दिया। इस वर्ष भी धान व खरीफ की फसल में सूखे की वजह से बीज तक नहीं अंकुरित हुए। वहीं सदर तहसील के बंबिया गांव निवासी राजू प्रसाद प्रजापति ने बताया कि उनके पास पांच बीघे जमीन है। अन्य भाइयों के साथ मिलकर उसने वर्ष 2009 में एक ट्रैक्टर खरीदा था। उसकी आधी रकम तो चुकता कर दी है, लेकिन अब आगे की किश्त कैसे चुकता करें। खेती में इस वर्ष पूरे साल खाने तक के लिए फसल नहीं हुई। पौहार मजरा देवखेरा निवासी रामसचेत त्रिपाठी ने बताया कि स्टेट बैंक शाखा से उसने वर्ष 2007 में 40 हजार रुपए कर्ज लिया था। तब से वह चाहकर भी बैंक का कर्जा नहीं चुकता कर सके। इसके अलावा रिश्तेदारों से भी उसने 20-22 हजार रुपए का कर्ज ले रखा है। गांव में अमीन के दस्तक देते ही उनकी सांसे थम जाती हैं। वहीं पौहार के किसान शिवबहादुर ने बताया कि उनका पिछला ही कर्ज नहीं चुकता हुआ। आगे भी खेतों में कुछ पैदा नहीं होने से कर्ज लेने को मजबूर हैं। राजस्वकर्मी कभी-कभार वसूली के लिए आते हैं तो उनका दिल बैठने लगता है।
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