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प्रक्रिया सरल पर दलालों का दखल

Banda

Updated Sun, 15 Jul 2012 12:00 PM IST
बांदा। छात्रवृत्ति या विद्यालयों में प्रवेश के लिए आय-जाति व निवास प्रमाणपत्र बनवाना छात्र-छात्राओं व उनके अभिभावकों के लिए मुसीबत का सबब है। तहसील में कागजात बनवाने की प्रक्रिया तो बेहद सरल है, लेकिन यहां सक्रिय दलाल व लेखपालों के मुंशियों के दखल से छात्र-छात्राओं के साथ उनके अभिभावक भी परेशान हो रहे हैं। प्रमाणपत्र जल्दी देने के नाम पर तयशुदा शुल्क से कई गुना ज्यादा रकम वसूली जा रही है। बिना ‘दक्षिणा’ काम नहीं तो दौड़ने से बेहतर है कि उसे देकर ‘एक हाथ दे दूसरे हाथ ले’ का फंडा अपनाना लोगों की मजबूरी बन गई है।
शासन ने परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले गरीब छात्र-छात्राओं के प्रोत्साहन के लिए छात्रवृत्ति देने की महत्वाकांक्षी योजना लागू की थी। यही योजना छात्र व उनके अभिभावकों के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। विद्यालयों में प्रधानाचार्यों ने वजीफा का लाभ लेने वाले बच्चों से 31 जुलाई तक आवेदन फार्म के साथ आय व जाति प्रमाणपत्र संलग्न करने को कहा है। यह प्रमाणपत्र बनवाने में कईं विलंब हो न जाए, इसके लिए छात्र-छात्राएं व उनके अभिभावक जमकर पसीना बहा रहे हैं। सदर तहसील से जुड़े तिंदवारी ब्लाक के अंतिम छोर तक लोग कागजात बनवाने के लिए सुबह से ही तहसील परिसर में दस्तक दे रहे हैं।
तहसील में आय व जाति प्रमाणपत्र के लिए फॉर्म खरीदते समय दलाल गांव के इन सीधे-सादे अभिभावकों पर डोरे डालना शुरू कर देते हैं। यदि इनसे किसी तरह बचकर अभिभावक काउंटर पर पहुंचते हैं तो वहां 20 दिन में प्रमाणपत्र मिलने की बात कही जाती है। अभिभावक के चेहरे पर निराशा के भाव भांपते ही दलाल उनके इर्दगिर्द मंडराने लगते हैं। उन्हें पांच-छह दिन में प्रमाणपत्र दिलाने का जिम्मा ले लेते हैं। मजबूरी में अभिभावक व छात्र-छात्राओं को इनके चंगुल में फंसना पड़ता है। इसके एवज में उनसे 400-600 रुपए ऐंठ लिए जाते हैं। साथ ही दूर-दराज से आने वाले अभिभावकों को इन कागजों के लिए दो-दो, तीन-तीन चक्कर काटने पड़ते हैं। इसमें भी उनका किराया भाड़ा व चाय-पान में सैकड़ों रुपया खर्च हो जाता है। इन दलालों की साठगांठ सीधे लेखपालों के मुंशी से रहती है, जो तयशुदा कमीशन लेकर काम निपटाते हैं। उधर अतर्रा में भी प्रमाणपत्र बनवाने में लोगों को दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। तहसील कर्मी व वहां मौजूद दलालों के चंगुल में फंसकर लोग शोषण का शिकार हो रहे हैं। सुबह दस बजे से तहसील परिसर में प्रमाणपत्र बनवाने वालों की भीड़ हो रही है। लोगों ने तहसील प्रशासन से इस गोरखधंधे पर अंकुश लगाने की मांग की है।
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