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बुंदेलखंड की बिजली से रोशन हो रहे कन्नौज, इटावा

Banda

Updated Sat, 16 Jun 2012 12:00 PM IST
बांदा। बुंदेलखंड मेें बिजली का मुद्दा अब तूल पकड़ने वाला है। राज्यसभा सांसद गंगाचरण राजपूत ने कहा है कि बुंदेलखंड की बिजली बुंदेलखंड को मिलनी चाहिए। यहां पैदा हो रही बिजली कन्नौज, इटावा और मैनपुरी को 24 घंटे गुलजार कर रही है। बुंदेलखंड को सिर्फ 12 घंटे बिजली मिल रही है।
सांसद ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर वे पूरे बुंदेलखंड में आंदोलन छेडे़ंगे। जालौन में भारी हुजूम के साथ डीएम को ज्ञापन देकर शुरुआत कर दी है। जल्द ही कमिश्नरी मुख्यालय बांदा में भी यह आंदोलन होगा। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड स्थित पारीछा बिजलीघर 440 मेगावाट बिजली बनाता है। यह बिजली कन्नौज, इटावा और मैनपुरी को दी जा रही है, जबकि बुंदेलखंड तरस रहा है। बमुश्किल 12 घंटे मयस्सर हो रही है। यह सौतेला व्यवहार अब नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि विश्वनाथ प्रताप सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में बुंदेलखंड को कटौती मुक्त किया गया था। यह भी कहा कि बुंदेलखंड के बांशिदों से बिजली के दाम नगरीय क्षेत्र वाले लिए जा रहे हैं, जबकि बिजली उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों के बराबर मिल रही है। बुंदेलखंड पर यह दोहरी मार है। उन्होंने उदाहरण दिया कि ऊंचाहार स्थित एनटीपीसी बिजलीघर से रायबरेली और सुल्तानपुर को सीधे बिजली दी जा रही है। इसी तरह पारीछा से बुंदेलखंड को मिलनी चाहिए। यहां 24 घंटे आपूर्ति के बाद जो बिजली बचे, उसे चाहे जहां दिया जाए।

कैबिनेट का फैसला वापस लें या फिर बिजली दें
बांदा। ‘या तो कैबिनेट का डिसीजन वापस ले लें। या बुंदेलखंड को बिजली दे दीजिए। बुंदेलखंड में बिजली कटौती नहीं हो सकती। केवल आपात स्थिति में ही कटौती की जा सकती है। बुंदेलखंड का टंप्रेचर 48 से 50 डिग्री तक है। ऐसे में बिजली दिन में 12 बजे से 4 बजे तक कट रही है’।
यह बात विधायक विवेक कुमार सिंह ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में अपने बजट भाषण में कही। उन्होंने कहा कि 24 हजार करोड़ की लागत वाला 4400 मेगावाट का बिजलीघर भारत सरकार ने बरगढ़ में लगाने को दिया था लेकिन तत्कालीन सरकार ने जमीन नहीं दी। वह छतरपुर में लगा दिया गया। बसपा सरकार ने बांदा में नहीं लगने दिया। पिछले पांच साल में ऊर्जा मंत्री वही बोला करते थे जो अधिकारी लिखते थे। ऊर्जा मंत्री नाम की कोई चीज नहीं थी। बांदा को पहले 24 घंटे बिजली मिलती थी।
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