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धान को घटिया बता मिल मालिकों ने खड़े किए हाथ

Banda

Updated Sun, 16 Dec 2012 05:30 AM IST
बांदा। धान की क्वालिटी घटिया बताकर राइस मिल मालिकों ने लाट लेने से हाथ खड़ा कर दिया है। विभिन्न सरकारी एजेंसियों ने अभी तक करीब 1200 मीट्रिक टन धान की खरीद की है। इसमें महज 136.50 मीट्रिक टन धान कुछ मिल मालिकों ने लिया है, जबकि एक हजार 59 मीट्रिक धान क्रय केंद्रों पर ही डंप है। ऐसे में एजेंसियां भी धान खरीद कोई रुचि नहीं दिखा रही हैं। किसान अपनी उपज बेंचने के लिए दर-दर भटक रहा है।
शासन से जिले को 16 हजार 800 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य मिला था। यह लक्ष्य पिछले वर्ष 25 हजार 250 मीट्रिक टन था। गत वर्ष के सापेक्ष यह लक्ष्य काफी कम है। 15 दिसंबर तक सरकारी एजेंसियों ने महज 1195.38 मीट्रिक टन धान ही खरीदा है। लक्ष्य का यह सिर्फ 7.11 फीसदी है। इसमें भी 136.60 एमटी धान राइस मिल मालिकों के यहां भेजा गया है। 1058.78 एमटी धान क्रय केंद्रों पर ही डंप है। विपणन शाखा ने सर्वाधिक 813.44 एमटी, पीसीएफ ने 128.74 एमटी, यूपी एग्रो ने 128.20 एमटी, उप्र कर्मचारी कल्याण निगम ने 106.60 एमटी तथा यूपीएसएस ने सबसे कम 18.40 एमटी धान की खरीद की है। एनसीसीएफ के अभी तक एक भी केंद्र नहीं खुले, जबकि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को धान खरीद का 1000 एमटी लक्ष्य मिला है। उसके अभी तक एक भी केंद्र में धान की खरीद नहीं शुरू हुई। सरकारी धान खरीद से अभी तक 358 किसान लाभान्वित हुए हैं। एजेंसियों ने अब तक की खरीद का 14 लाख 94 हजार 225 रुपए का भुगतान किसानों को कर दिया है।
सरकारी एजेंसियों से धान लेने के लिए 33 राइस मिल मालिकों से एग्रीमेंट किया गया है। मिल मालिकों का कहना है कि धान की क्वालिटी घटिया होने के कारण चावल की रिकवरी मानक के अनुसार नहीं मिल पा रही है। ऐसे में एफसीआई चावल लेने में आनाकानी करता है। धान खराब होने से कुटाई में टूटता अधिक है। इससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। मिल मालिकों के हाथ खड़ा कर देने से खरीद एजेंसियों में 1058.78 एमटी धान डंप है। भंडारण की जगह न होने से एजेंसियां धान खरीदने में रुचि नहीं ले रही हैं। ऐसे में किसान अपनी उपज बेचने को दर भटक रहा है।
डिप्टी आरएमओ महेश श्रीवास्तव ने बताया कि क्वालिटी के लिए मिल मालिकों से बातचीत की जा रही है। उम्मीद है कि कोई न कोई हल निकल आएगा। केंद्रों पर डंप धन जल्द ही मिलों को भेजा जाएगा। इससे धान की खरीद प्रभावित नहीं है। किसानों के धान की तौल केंद्रों पर की जा रही है।
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