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निभौर में अजब-गजब चकबंदी

Banda

Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
बांदा। चकबंदी विभाग की कारगुजारियां गाहे-बगाहे चर्चा में आती रहती हैं। इसी क्रम में एक और कारनामा सामने आया है। चकबंदी अधिकारियों ने लाख रुपए की जमीन एक रुपए और एक रुपए की जमीन लाख रुपए दर्ज कर दिए। रसूख वालों और माफियाओं को बीहड़ से हटाकर सड़क किनारे चक दे दिए गए। अब माफिया किसानों की खड़ी फसल रौंदकर चक हासिल कर रहे हैं। इस अंधेरगर्दी की मंडलायुक्त से शिकायत की गई तो उन्होंने जांच के आदेश दे दिए लेकिन महीना भर बीत चुका है पर कोई अफसर मौके पर नहीं पहुंचा। कांग्रेस ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
मामला बबेरू क्षेत्र के निभौर गांव का है। यहां 1985 में चकबंदी शुरू हुई थी। चकबंदी विभाग के चालाक अफसरों ने राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) किनारे के चक गाटा संख्या 1162, 1175 और 1202 की मालियत 60 और 70 पैसे लगाई है। दूसरी तरफ डूब क्षेत्र या बीहड़ में स्थित जमीन की भी मालियत 50 से 70 पैसे लगाई है। रसूख वालों पर मेहरबान चकबंदी अधिकारियों ने उनकी बीहड़ की जमीनों के स्थान पर सड़क किनारे के चक बना दिए हैं। गरीब किसानों को सड़क किनारे से बीहड़ में जमीन दे दी है। नियमानुसार सड़क किनारे जमीन अचक होती है लेकिन नियमों की अनदेखी करके यहां उड़ान चक बना दिए गए हैं। उदाहरण के तौर पर गाटा संख्या 1259 एक गरीब किसान इशरत अली का है। यहां की मालियत 10 पैसे लगाई गई है जबकि इसी खेत के बगल में 1258 और 1260 नंबर के खेत की मालियत 60 और 70 पैसे दर्ज की गई है।
गांव में लगभग एक सैकड़ा किसानों की 500 बीघा जमीन बीहड़ पड़ी है। इनमें छह किसानों की जमीन में चकबंदी वालों ने मालियत लगाकर दूसरी जगह चक दे दिए हैं। शेष जमीन गोचर घोषित कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि निभौर गांव में जमीन की कीमत प्रति बीघा 50 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक है। एनएच किनारे जमीन की कीमत 10 लाख रुपए प्रति बीघा है लेकिन एनएच किनारे मालियत घटाकर चकबंदी कर्मियों ने दबंगों को चक दे दिए हैं। गांव किनारे अस्पताल, स्कूल की जमीन पर रसूख वालों के चक बना दिए गए हैं। स्कूल आदि के लिए एक किलोमीटर दूर जमीन दी गई है। पैमाइश करके चक आंवटित करने का काम नियमानुसार अप्रैल से जून के बीच होता है। इन दिनों खेत खाली रहते हैं। लेकिन चकबंदी अधिकारियों की महिमा है कि खेती के समय में चक आवंटित किए जा रहे हैं। लोग एक-दूसरी की फसल उजाड़ने में लगे हैं।
चकबंदी विभाग की इस अंधेरगर्दी पर किसानों ने मंडलायुक्त से शिकायत की थी। आयुक्त ने जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि एक माह बीत जाने के बाद भी कोई अधिकारी जांच को नहीं पहुंचा। जिला कांग्रेस अध्यक्ष साकेत बिहारी मिश्र और प्रदेश कांग्रेस सदस्य इंद्रजीत यादव ने मांग की कि है कि किसानों के हित में पूरी चकबंदी प्रक्रिया निरस्त कर पुन: चकबंदी कराई जाए नहीं तो आंदोलन छेड़ा जाएगा।
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