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मृदा परीक्षण में 25 लाख की बर्बादी!

Banda

Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
बांदा। कृषि महकमे से जुड़े मृदा परीक्षण विभाग में सरकारी धन की बर्बादी की जा रही है। दलहनी फसल के बीज को शोधित करने के लिए राइजोवियम कल्चर के पैकेट किसानों को अनुदान पर वितरित किया जाना है। मंडल में 2,77,086 पैकेट वितरित किए जाने हैं। इन पैकेटों कीमत करीब 25 लाख रुपए है। तकरीबन 90 फीसदी फसल की बुवाई किसान कर चुके हैं, पर अभी तक विभाग में पैकेट तैयार नहीं हो सके। विभागीय लापरवाही से अब शासन के 25 लाख रुपए पानी में चले जाएंगे।
गौरतलब है कि बुंदेलखंड की धरती पर दलहनी फसल की बेहतरीन उपज के लिए शासन पानी की तरह पैसा बहा रहा है। बीज शोधन पर शासन लाखों रुपए खर्च कर रही है। बैक्टीरिया वायु मंडल से नाइट्रोजन खींचकर पौधों को प्रदान करते हैं। इससे तना मजबूत होता है और फसल की अच्छी पैदावार होती है। चित्रकूट मंडल में किसानों को दलहनी फसल के बीज के शोधन के लिए राइजोवियम बैक्टीरिया के पैकेट अनुदान पर उपलब्ध कराए जाने हैं। इसके लिए प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग लक्ष्य रखा गया है। मृदा परीक्षण विभाग में 2,77,086 पैकेट तैयार होना है। इनमें बांदा के लिए 88,520, हमीरपुर 86,499, महोबा 46,179 तथा चित्रकूट के लिए 55,888 वैक्टीरिया के पैकेट तैयार करने का लक्ष्य है। एक पैकेट की कीमत करीब नौ रुपए है, पर शासन से इसे अनुदान पर किसानों को सवा दो रुपए में दिया जाना है।
दलहनी फसल की बुवाई का उपयुक्त समय 20 नवंबर तक है। मंडल में किसान अभी तक तकरीबन 90 फीसदी चना, मसूर व मटर की फसल बो चुके हैं। दलहनी फसल बोने के बाद ज्यादातर किसान गेहूं की बुवाई में जुट गए हैं लेकिन विभाग में अभी तक लक्ष्य के मुताबिक पैकेट तैयार नहीं हो सके। मृदा परीक्षण विभाग से पैकेट तैयार होकर कृषि विभाग के गोदामों में जाएंगे। यहां से किसानों में वितरित किए जाएंगे। दलहनी फसल की बुवाई हो चुकी है। ऐसे में करीब 25 लाख रुपए की लागत से तैयार इन पैकेटों को पूछने वाला कोई नहीं है। बड़ोखर के किसान हरिशंकर, निवादा के भरतबाबू, छिबांव के राममिलन द्विवेदी आदि ने बताया कि विभाग में कल्चर तैयार करने में भी धोखाधड़ी की जा रही है। बैक्टीरिया की जगह फर्जी केमिकल मिलाया जाता है, जिससे फसल को कोई फायदा नहीं पहुंचा। ऐसे में किसान ये पैकेट लेने में हाथ खींचते हैं।
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