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10 दिन में छीन लिया 10,000 क्यूसिक पानी

Banda

Updated Sun, 04 Nov 2012 12:00 PM IST
बांदा। सिंचाई के लिए पानी के संकट से जूझ रहे बांदा जनपद के किसानों के साथ मध्य प्रदेश ने बड़ी हक तलफी करते हुए लगभग 10 हजार क्यूसिक से ज्यादा पानी जबरन हड़प लिया है। बरियारपुर वियर में नहर का गेट चार फिट ऊंचाकर दबंगईपूर्वक पानी छीनने का यह सिलसिला पिछले 10 दिनों से लगातार चल रहा है। यूपी सरकार और सिंचाई विभाग असहाय बनकर रह गया है। बताते हैं कि छीने गए इस पानी से बांदा जनपद की लगभग 2500 हेक्टेयर भूमि सींची जा सकती थी।
गौरतलब है कि छतरपुर जनपद में बन्ने नदी में 1957 में उत्तर प्रदेश सरकार ने रनगवां बांध का निर्माण कराया था। तब इसकी लागत लगभग एक करोड़ रुपए आई थी। शुरू में इसकी जल संग्रहण क्षमता 5.48 टीएमसी थी लेकिन तलहटी पर लगातार सिल्ट जमते रहने से क्षमता घटकर अब 3.40 टीएमसी रह गई है। रबी की सिंचाई के लिए रनगवां बांध केन नहर के पोषण का मुख्य स्रोत है। अगस्त 1972 में मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाशचंद्र सेठी और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के हस्ताक्षरों से दोनों सूबों के बीच पानी बंटवारे का समझौता हुआ था। इसके मुताबिक मध्य प्रदेश खरीफ फसलों के लिए बांध से दो टीएमसी तक पानी 31 अक्तूबर तक ले सकता है। यूपी और एमपी के बीच पानी का अनुपात 36 और 15 का रहेगा। समझौते के बाद मध्य प्रदेश ने 1979 में 292 क्यूसिक क्षमता की रनगवां नहर बनाकर अपने हिस्से का पानी लेना शुरू कर दिया।
यहां पर उल्लेखनीय है कि पानी लेने के मामले में मध्य प्रदेश की नीयत शुरू से ही खराब रही है। उसने रनगवां बांध के बाद केन नदी के कैचमेंट क्षेत्र में दो बांध (बांधा नाला बांध और बूढ़ा बांध) बनवा लिए। इसके अलावा बेनी सागर फीडर का भी निर्माण करा लिया। इन अवरोधों के चलते केन नदी के बहाव में कमी होने लगी। अपने हिस्से का पानी लेने के बाद बांध में बचे उत्तर प्रदेश के पानी को मध्य प्रदेश का सिंचाई विभाग जबरन ले रहा है। बीते 25 अक्तूबर से मध्य प्रदेश ने बरियारपुर बियर में अपनी नहर का गेट चार फिट ऊंचा उठाकर 500 क्यूसिक पानी लगातार ले रहा है। पिछले 10 दिनों में अब तक मध्य प्रदेश लगभग 10 क्यूसिक पानी हथिया चुका है। इस पानी से बांदा (उत्तर प्रदेश) के किसान अपने 2429 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई कर सकते थे।
इस संबंध में सिंचाई प्रखंड (तृतीय) बांदा अधिशासी अभियंता दीपक कुमार का कहना है कि वह इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं कर सकते। मध्य प्रदेश की कारगुजारी से उन्होंने अपने उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है। फिलहाल मध्य प्रदेश द्वारा रनगवां बांध से यूपी के हक का पानी लिए जाने का सिलसिला जारी है।
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