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दो चरणों में सिर्फ 45 फ ीसदी लिए नमूने

Banda

Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
बांदा। खेती की पैदावार बढ़ाने के लिए रबी की बुवाई के पहले शासन द्वारा चलाया गया ‘अपनी मिट्टी पहचानो अभियान’ मंडल में फि सड्डी रहा। संबंधित विभागों द्वारा दिलचस्पी न लिए जाने से दो चरणों में लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 45 फ ीसदी नमूने लिए गए। बांदा जिला सबसे पीछे रहा। यहां 13,700 के मुकाबले मात्र 2056 नमूने इकट्ठे हुए।
प्रमुख सचिव कृषि राजीव कपूर ने लक्ष्य निर्धारित करते हुए कहा था कि रबी की बुवाई के पहले मृदा परीक्षण कर जिन तत्वों की कमी पाई जाए उसी के मुताबिक संबंधित उर्वरकों का इस्तेमाल किया जाए। इसके लिए मिट्टी के नमूने इकट्ठे करने को तीन चरणों 30 सितंबर, 4 अक्टूबर और 8 अक्टूबर को अलग-अलग लक्ष्य दिया गया था। पहले चरण में बांदा जिले में 8220, चित्रकूट में 3885, हमीरपुर जिले में 6805 और महोबा में 5760 नमूने इकट्ठे किए जाने थे। इसके सापेक्ष बांदा में 719, चित्रकूट में 3494, हमीरपुर में 1815 और महोबा जिले में एक भी नमूना नहीं लिया गया। मंडल में 24,570 के मुकाबले मात्र 6028 नमूने इकट्ठेे हो पाए।
दूसरे चरण में बांदा जिले के लिए 5480, चित्रकूट में 2590, हमीरपुर में 4470 और महोबा में 4840 नमूने लिए जाने का लक्ष्य दिया गया। इनमें बांदा जनपद 1337 नमूने इकट्ठे करने के साथ सबसे फि सड्डी रहा। चित्रकूट में 2731, हमीरपुर में 2430, और महोबा जिले में 5352 नमूने इकट्ठे हुए। मंडल में दोनो चरणों में 40,950 के मुकाबले मात्र 17,838 नमूने इकट्ठे हुए हैं। संयुक्त निदेशक मृदा परीक्षण का कहना है कि नमूने इकट्ठा करने के लिए संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी, भूमि संरक्षण विभाग, भूमि एवं जल संसाधन विभाग, कृषि रक्षा अधिकारी और ब्लाकों में तैनात एडीओ (कृषि) व खंड विकास अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। भूमि विकास एवं जल संसाधन विभाग ने एक भी नमूना नहीं दिया। खंड विकास अधिकारियों में तिंदवारी ब्लाक के सिवाय किसी बीडीओ ने नमूने नहीं भेजवाए। तीसरे चरण के लिए प्रगति आख्या मिलने का इंतजार है।
वर्मी कंपोस्ट तैयार करने वालों को 5000 रुपए तक अनुदान मिलेगा। संयुक्त निदेशक मृदा परीक्षण ने बताया कि रासायनिक खादों का इस्तेमाल कम करने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। जिले में 45 ग्राम पंचायतों को वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार करने के लिए चयनित किया जाएगा। प्रत्येक ग्राम पंचायत में 5-5 लाभार्थियों को इसके लिए चयनित करेंगे। इनकी लागत का 50 फीसदी अथवा अधिकतम 5000 रुपए अनुदान दिया जाएगा।


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