आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

गंगा, घाघरा हर साल मचाती हैं तबाही

Ballia

Updated Mon, 24 Dec 2012 05:30 AM IST
बैरिया। यहां हर साल गंगा व घाघरा की तीव्र लहरें तांडव मचाती हैं। बाढ़ व कटान से हजारों की आबादी प्रभावित हो जाती है। रिहायशी मकान नदी में विलीन हो जाते हैं। सरकारी गैर सरकारी भवन और ऐतिहासिक स्थल अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। इतना ही नहीं बाढ़ की विभीषिका से हर साल हजारों एकड़ की फसलें और भारी संख्या में जनहानि होती है। लेकिन ठोस नीतियों के अभाव में कटान पीड़ित आज भी तटबंधों पर शरण लेकर झोपड़ियों में जीवन यापन करने को बाध्य हैं। जबकि प्रतिवर्ष बाढ़ के नाम शासन द्वारा करोड़ों रूपए खर्च किए जाते हैं। फिर भी बाढ़ का स्थाई हल नहीं निकल सका।
द्वाबा क्षेत्र में बाढ़ से हर साल प्रभावित होने वाले गंगा के तटीय गांव केहरपुर, शाहपुर, गंगौली, जगदेवा, टेंगरहीं, शिवपुर, कपूर दियर, नौरंगा सहित दर्जनों गांव हैं। साथ ही घाघरा नदी के बाढ़ से प्रभावित होने वाले दतहां, गोपालपुर, शिवपुर, मांझा, नवका गांव, मानगढ़, शिवाल मठिया, गोपालनगर, अधिसिझुआ, चांद दियर, पल्टूनगर, टोला फतेह राय, इब्राहिमाबाद, नौबरार सहित क्षेत्र के दर्जनों गांव बाढ़ की जद में आकर हर साल तबाह होते हैं। नदियों की उफनती लहर से प्रति वर्ष 50 हजार से अधिक की आबादी पर अस्तित्व का संकट उत्पन्न होता है। तहसील प्रशासन की ओर से प्रति वर्ष राहत के नाम पर लाखों एवं करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। पिछले पांच साल के विभागीय आंकड़ों पर ध्यान दें तो वर्ष 2007-08 में 18 लाख, वर्ष 2008-09 में 18,53,000, वर्ष 2009-10 में 19,26,000, वर्ष 2010-11 में 21 लाख रुपये तथा वर्ष 2011-12 में 25 लाख से ऊपर केवल सरकारी राहत के नाम पर खर्च किए गए। लेकिन शासन द्वारा किया गया सहयोग ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुआ। यदि ऐसा नहीं होता है तो तबाही के मंजर को रोकने की बात दिवास्पन होगी। इसी साल बाढ़ आने से पूर्व लोक निर्माण एवं सिंचाई मंत्री बाढ़ से राहत के लिए एकमुश्त 14 करोड़ रुपये द्वाबा विधानसभा के लिए आवंटित किया। किसी दूरदर्शी योजना के अभाव में अब तक बाढ़ प्रभावित लोगों को न तो आवासीय जमीन मिल पाई और न ही आवास। ऐसे में बाढ़ प्रभावितों को तटबंधों व सड़कों पर शरण लेकर झोपड़ियों में गुजर बसर करना पड़ रहा है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

इस तरह से रहना पसंद करते हैं नए नवेले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +

बारिश में कपल्स को रोमांस करते देख क्या सोचती हैं ‘सिंगल लड़कियां’

  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +

शाहरुख को सुपरस्टार बना खुद गुमनाम हो गया था ये एक्टर, 12 साल बाद सलमान की फिल्म से की वापसी

  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +

बिग बॉस ने इस 'जल्लाद' को बनाया था स्टार, पॉपुलर होने के बावजूद कर रहा ये काम

  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +

इस मानसून फ्लोरल रंग में रंगी नजर आईं प्रियंका चोपड़ा

  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +

Most Read

बुरे वक्त से निपटने के लिए लालू ने बनाया प्लान B, माया-मांझी का लेंगे सहारा!

RJD leader Lalu Prasad prepares plans alternate pact with Mayawati and Manjhi
  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +

यूपी: पेपर लीक गैंग ने लगाई दरोगा भर्ती में सेंध, पूरी परीक्षा रद्द

up police recruitment entire process cancel
  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +

कभी 30 रुपये देकर इसी किराये के मकान में रहते थे कोविंद, अब यहां जश्न

some important facts about ramnath kovind
  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

J&K: आर्मी के जवानों ने थाने में घुसकर पुलिस को पीटा, अब्दुल्ला बोले- कार्रवाई हो

soldier beat policemen in jammu six injured
  • रविवार, 23 जुलाई 2017
  • +

अलगाववादियों को भारत सरकार से भी मिल चुके हैं पैसे: फारूक अब्दुल्ला

GOI too gave funds to separatists says farook abdullah
  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +

दरोगा भर्ती: पहले हुई परीक्षा पर भी मंडराये संकट के बादल

inspector recruitment in uttar pradesh
  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!