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फूटी किस्मत! श्रम के धन के लिए करना पड़ रहा संघर्ष

Ballia

Updated Wed, 17 Oct 2012 12:00 PM IST
बलिया। पिछले साल माध्यमिक शिक्षकों के भारी आंदोलन के बाद सरप्लस शिक्षकों को छोड़ शासन ने जिले के अन्य शिक्षकों के वेतन भुगतान की बात कही थी। सरप्लस शिक्षकों को छोड़ सभी शिक्षकों का वेतन भुगतान शुरू भी कर दिया। लेकिन पता नहीं क्यों लेखाकार नहीं होने की बात कह शिक्षकों का चार से लेकर आठ माह तक का वेतन रोका गया है। ऐसे में शिक्षकों के बच्चों की पढ़ाई के साथ ही अन्य आवश्यक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
जिले के शिक्षकों द्वारा लंबे आंदोलन के बाद पिछले साल शासन ने सरप्लस को छोड़ शिक्षक / शिक्षणेतर कर्मचारियों का वेतन भुगतान करने का निर्णय लिया और वेतन भुगतान किया भी गया। लेकिन नए सत्र शुरू होते ही कुछ शिक्षक / शिक्षणेतर कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया और कुछ का जून से रोका गया। शिक्षकों के वेतन भुगतान की मांग पर डीआईओएस द्वारा गत कई माह से लेखाकार नहीं होने की बात कही जा रही है। साथ ही शिक्षकों से लेखाकार तैनाती की उच्चाधिकारियों से मांग की बात कह शीघ्र ही लेखाकार की तैनाती का आश्वासन मिलता रहा। आलम यह है कि चार से लेकर आठ माह तक बीत गया और माध्यमिक शिक्षक / शिक्षणेतर कर्मचारियों का वेतन भुगतान नहीं हो सका है। ऐसे में शिक्षक / शिक्षणेतर कर्मचारियों के सम्मुख भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। परेशान शिक्षकों ने विवश होकर 11 अक्तूबर को जेल भरो आंदोलन किया। फिर भी बात बनते न देख शिक्षक एमएलसी चेत नारायण सिंह को एक बार फिर जिले में आकर धरने पर बैठने के लिए बाध्य होना पड़ा। एमएलसी श्री सिंह को धरने पर बैठने की बात सुन शासन-प्रशासन के हाथ फूल गए और लखनऊ से लेकर बलिया तक फोन की घंटियां घनघनाने लगीं। तत्काल डीएम के निर्देश पर सदर एसडीएम धरना स्थल पर पहुंचे। डीआईओएस की उपस्थिति में शीघ्र ही वेतन वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू करने के आश्वासन पर विधायक ने धरने को देर शाम समाप्त किया। भूख से परेशान शिक्षकों को उम्मीद है कि अब वेतन का भुगतान हो जाएगा। लेकिन दूसरी तरफ एक प्रशभन उनके मन-मस्तिष्क में कौंध रहा कि क्या हर बार शिक्षकों को अपनी मेहनत की मजदूरी लेने के लिए आंदोलन ही करते रहना पड़ेगा? वह यह नहीं समझ पा रहे हैं कि कब तक समय से शिक्षक/शिक्षणेतर कर्मचारियों का वेतन भुगतान होना शुरू होगा।
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