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गंगा नदी के कटान ने निगली 20 एकड़ भूमि

Ballia

Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
रामगढ़। गंगा के गिरते जलस्तर से तटवर्ती गांवों और कृषि योग्य भूमि का धाराओं में विलीन होने का क्रम जारी है। रविवार को सोहरा कटान के चलते पचरूखिया से लेकर शाहपुर तक करीब 20 एकड़ जमीन और कई बीघे रिहायशी भूमि कट कर गंगा में चली गई।
हर साल गंगा के प्रयलकारी लहरों का दंश झेल रहे लोगों का कहना है कि अब तक गांवों को बचाने की कोशिश क्यों नहीं की जा रही है। जब हम पीड़ित की पीड़ा जब चरम पर होती है तो उस समय शासन-प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि तक आश्वासनों का अंबार लगा दिया जाता है। लेकिन जैसे ही गंगा फिर अपने नीचे स्तर पर चली जाती है तो सभी इस मामले के प्रति उदासीन बन जाते हैं। इसी का परिणाम है कि दशकों बाद भी लोगों को गंगा के रिहायशी आवास और कृषि योग्य भूमि को जलसमाधि लेने से नहीं बचाया जा सका। क्षेत्र के गंगा किनारे बसे गांव श्रीनगर निवासी नारायण सिंह व परमात्मा सिंह का कहना है कि पिछली बार आई बाढ़ में गंगौली गांव का अस्तित्व समाप्त हो रहा था, उस समय विधायक से लेकर सांसद तक हम पीड़ितों के बीच पहुंचे और हमारी समस्यासओं से रूबरू हुए थे। उस दौरान सांसद नीरज शेखर ने कहा कि चाहकर भी हम आप पीड़ितों की मदद नहीं कर पा रहे हैं। कारण की सूबे में मेरी सरकार नहीं है। फिर भी आपका मामला संसद में उठाऊंगा और गांवों को बचाने का प्रयास करूंगा। उन्होंने कहा कि आज तो सूबे में सांसद की पार्टी की ही सरकार है। समय गया है जब सांसद अपने वादों को पूरा करते हुए गांवों का बचाने का प्रयास करें। ताकि हर साल बाढ़ व कटान से छिनने वाला अमन-चैन न छिन सके, साथ ही बच्चों की शिक्षा व चिकित्सा पर ग्रहण न लग सके। रिकनीछपरा निवासी संजय शुक्ला व संजय मिश्रा का कहना है कि हम पीड़ितों की पीड़ा सुनने व जानने का समय शासन-प्रशासन के पास नहीं है। जब कभी दबाव पड़ता है तो कटान स्थालों व कटान पीड़ितों के बीच पहुंच कर आश्वासनों का जन्मघूटियां पिलाते हुए घड़ियाली आंसू बहाया जाता है। अजय व मनीष सिंह का कहना है कि गंगा के बेरहम लहरों से बेघर हुए लोगों को दशकों बाद भी भूमि रिहायशी भूमि की व्यवस्था नहीं हो सकी। शासन प्रशासन को चाहिए कि शीघ्र ही कटान पीड़ितों को रिहायशी भूमि की व्यवस्था कर उनकी समस्याओं का स्थायी हल निकालने का प्रयास करना चाहिए। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के मुताबिक रविवार की शाम गंगा जलस्तर 56.760 मीटर दर्ज की गई। साथ ही प्रतिघंटा एक सेमी. का घटाव जारी है।
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