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दान की जमीन पर रहने को विवश

Ballia

Updated Mon, 06 Aug 2012 12:00 PM IST
सुरेमनपुर। अगस्त क्रांति की जंग में शहीद हुए धर्मदेव मिश्रा की बेवा 90 वर्षीय सोनिया देवी इन दिनों आर्थिक तंगी, लाचारी और बेबस की जिंदगी काटने को मजबूर हैं। दान में मिले दूसरों की जमीन में बने जर्जर छप्पर में किसी तरह सिर छुपाती हैड्ड। बैरिया थाना क्षेत्र के शुभनथहीं निवासी धर्मदेव मिश्र स्वतंत्रता आंदोलन में देश के लिए खुद को न्योछावर करने वालों में से थे, लेकिन उनकी विधवा फांकाकशी की शिकार है। उन्हें दो वक्त की रोटी भी बड़ी मुश्किल से मिलती है। चौथेपन में पहुंची सेनानी की बेवा पट्टीदारों के रहमोकरम पर जीवित हैं। देश को आजाद हुए 65 साल बीत गए लेकिन शासन-प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों ने इनकी बेबसी की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखा।
अगस्त क्रांति की लड़ाई में 18 अगस्त 1942 की जंग के क्रांतिवीरों को प्रतिवर्ष भले ही तमाम जनप्रतिनिधि बैरिया थाने के सामने बने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर लंबा-चौड़ा भाषण दे देते हैं। लेकिन स्वतंत्रता आंदोलन के शहीदों के परिजन वर्तमान समय में बदहाली के दौर से गुजर रहे हैं। आज तक किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि शहीदों के परिजन कैसे हैं ? बता दें कि 18 अगस्त 1942 को बैरिया थाना क्षेत्र के शुभनथहीं निवासी पेशे से किसान गोकुल मिश्रा का 17 वर्षीय पुत्र धर्मदेव मिश्रा बैरिया इंटर कालेज में कक्षा आठ में पढ़ने के लिए निकला था तबतक बैरिया थाने पर लगे ब्रितानिया सरकार के जैक को उतार फेंकने के बाद तिरंगा फहराने का कार्य करने लगे। इस क्रांतिकारी कार्य में 17 लोगों को अंग्रेज के जवानों ने गोली मार दी। जबकि तीन लोगों की मौत जेल यातना के दौरान हुई। बैरिया थाने के सामने बने शहीद स्मारक के शिलापट्ट पर 13वें नंबर पर धर्मदेव मिश्रा का नाम आज भी अंकित है। सेनानी धर्मदेव मिश्रा की शादी 13 वर्ष की अवस्था में हो गई थी। 17 वर्ष की आयु में वे शहीद हो गए। उनकी कोई संतान नहीं है। धर्मदेव मिश्रा के पिता गोकुल मिश्रा पशुपति बाबा के स्थान पर झोपड़ी लगाकर जीवन यापन करते थे। कुछ वर्ष धर्मदेव की बेवा सोनिया देवी को सिर छुपाने के लिए जगह नहीं था और नहीं एक धूर जमीन ही सरकारी रिकार्ड में था। आज से करीब चार वर्ष पूर्व पशुपति बाबा के शिष्य ब्यासी सर्वजीत सिंह ने पट्टीदार सुदर्शन मिश्र से आधा कट्ठा जमीन लेकर दो कमरे का घर बना दिया। पट्टीदार की बेबस विधवा सावित्री देवी शहीद की बेवा सोनिया देवी की देखभाल करने के साथ दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करती हैं। इनके पेंशन के लिए कागजी कोरम पूरा कर केंद्र को भेजा गया लेकिन आज तक नहीं मिला। राज्य सरकार के द्वारा सात हजार रुपये प्रतिमाह मिलने वाले पेंशन में ही शहीद की बेवा सोनिया और बेबस विधवा महिला सावित्री देवी के परिवार का पालन पोषण होता है।
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