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30 हजार छात्र मीठा जहर पीने को मजबूर

Ballia

Updated Thu, 02 Aug 2012 12:00 PM IST
बलिया। केंद्र और राज्य सरकार जहां एक तरफ शिक्षा और चिकित्सा पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। वहीं जिले के विभिन्न विद्यालयों में शुद्ध पेयजल के लिए फूटी कौड़ी भी नहीं मिल रहा है। लाखों छात्र आर्सेनिक और आयरनयुक्त पानी पीने को बाध्य हैं। सरकार ने विद्यालयों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास किया तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी लापरवाही बरतते हैं।
जिले में कुल 457 माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं। इसमें से 91 सरकारी सहायता प्राप्त, 28 राजकीय विद्यालय तथा 338 स्ववित्तपोषित विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में करीब तीन लाख छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं। लेकिन इन छात्रों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए न तो सरकार ने ही कोई योजना बनाई है न ही विद्यालय प्रबंधन ने ही योजना बनाई। छात्र-छात्राएं बाध्य होकर आर्सेनिकयुक्त के साथ ही अशुद्ध जल पीने को मजबूर हैं। इससे छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य पर काफी दुष्प्रभाव पड़ता है। चिकित्सकों की मानें तो आर्सेनिकयुक्त जल पीने से चर्मरोग, कैंसर के साथ ही किडनी फेल होने समेत कई बीमारियां होती हैं। अगर द्वाबा की बात की जाए तो पीएन इंटर कालेज दुबेछपरा में करीब 2000, बालिका विद्यालय दुबेछपरा में 500, बाबा लक्ष्मणदास इंटर कालेज बैरिया में 1000, अमर शहीद कौशल इंटर कालेज नारायणगढ़ में 2000, आदर्श इंटर कालेज मझौवां में 800, श्रीकृष्ण उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय पियरौंटा में 500, रामसिद्ध उच्चतर महाविद्यालय सोनवानी में 500, मीरा देवी बालिका विद्यालय हल्दी में 600, आचार्य नरेंद्रदेव इंटर कालेज बहुआरा में 800, रामनाथ पाठक इंटर कालेज मुरार पट्टी में 1000, प्रभावती बालिका इंटर कालेज जयप्रकाश नगर में 700, रामरती विद्यालय करनछपरा में 600, जय प्रकाश इंटर कालेज जयप्रकाश नगर में 600 छात्र-छात्रा अध्ययन कर रहे हैं। वहीं नगर के राजकीय बालिका इंटर कालेज, राजकीय इंटर कोलज, सोहांव विकास खंड के सेवा संघ इंटर कालेज, श्री सिद्धेश्वर नाथ इंटर कोलज सहित जिले के करीब सभी विद्यालयों में हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं शिक्षा लेने के लिए पहुंचते हैं। लेकिन विद्यालयों में आर्सेनिक मुक्त पेयजल उपलब्ध कराने की कोई व्यवस्था नहीं हैं। इसके प्रति न तो शासन ही संवेदनशील है न ही प्रबंधन। ऐसे में इन क्षेत्रों के हजारों की संख्या में बच्चे आर्सेनिकयुक्त जल पीने को बाध्य होते हैं।
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