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घाघरा में समा रही भूमि पर लगान!

Ballia

Updated Mon, 23 Jul 2012 12:00 PM IST
सुरेमनपुर। उत्तरी दियरांचल में पांच से 10 एकड़ भूमि के स्वामी कुछ ही दिनों में भूमिहीन हो सड़क पर आ गए हैं। ऐसे में उनके दो वक्त की रोटी पर आफत आ गई है। अब तक सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि घाघरा में समा चुकी है। प्रशासन सब कुछ जानते हुए अभी भी इससे अनजान बना हुआ है। तभी कटान की भूमि का मुआवजा दिलाने के बजाय लगान वसूली के लिए दरवाजे पर अमीन पहुंच रहे हैं। इसको लेकर किसानों में काफी आक्रोश है।
उत्तरी दियरांचल के एक दर्जन से अधिक मौजों में बसने वाले करीब आठ हजार किसानों का भरण-पोषण कृषि और पशुपालन पर निर्भर है। अब तक एक हजार से अधिक किसानों का सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि घाघरा का ग्रास बन चुकी है। बावजूद शासन प्रशासन द्वारा पीडि़त किसानों को मुआवजा उपलब्ध नहीं कराया। लेकिन लगान की वसूली के लिए अमीनों को उनके दरवाजे पर जरूर भेज दिया। दियरांचल के किसान अपनी मेहनत मजदूरी से खेती व पशुपालन कर एक-एक इकट्ठा कर बेटियों का हाथ पीला करने से लेकर बच्चों को शिक्षा दिलाने का काम करते हैं।
अधिसिझुआ और चांद दियर मौजा के किसान चाईछपरा निवासी भूलन यादव का छह एकड़, सिरोधन यादव का दो एकड़, कमला यादव का चार एकड़, लल्लन यादव का पांच एकड़, परशुराम यादव का दो एकड़ भूमि के काश्तकार थे। लेकिन घाघरा ने इनकी सारी भूमि को धीरे-धीरे निगल लिया है। अब इनके साथ ही करीब एक हजार किसानों के पास खेती के लिए एक धुर भी जमीन नहीं है। ऐसे में बैरिया तहसील प्रशासन इन्हें मुआवजा देने की बजाय इनके दरवाजों पर लगान की वसूली के लिए अमीनों को भेजा जा रहा है। अब ये अमीनों को देख सिर पिट रहे हैं कि पूरा का पूरा खेत घाघरा ने निकल लिया है। हम कटानपीडि़तों के निवाले पर आफत पड़ी हुई है। ऐसे में सरकार को लगान दें तो कहां से दें। इसको लेकर दियरांचल के किसान शासन-प्रशासन के प्रति आक्रोशित हैं। किसानों का कहना है कि अधिकारी व जनप्रतिनिधि एसी कमरे में बैठकर सोचते हैं कि किसान मालामाल हैं तभी तो भूमि को पानी में चले जाने के बावजूद वसूली के लिए अमीनों को किसानों के पास भेज रही है। उधर, बैरिया उपजिलाधिकारी शीतला प्रसाद यादव ने कहा कि जिन किसानों की उपजाऊ भूमि नदी में विलीन हो चुकी है, उसे नियम के तहत लगान माफी के लिए आवेदन करना होगा। तभी लगान की माफी संभव हो सकती है। साथ ही कहा कि वित्तीय वर्ष 2012-13 हुए कटान का ही आवेदन स्वीकार कर जांचोपरांत पीडि़त किसान को मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा। अन्य वित्तीय वर्ष के कटान की भूमि के मुआवजा का प्रार्थना पत्र स्वीकार नहीं होगा।
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