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बैरिया में 23 फीसदी अधिक तेल का हुआ था एलाटमेंट

Ballia

Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
सुरेमनुपर। बैरिया तहसील के अधिकांश कोटेदार मालामाल हैं, जबकि अधिकतम कोटेदारों के पास उपभोक्ताओं को देने के लिए पर्याप्त मिट्टी तेल भी नहीं है। जनवरी 2012 में डीएसओ ने जांचोपरांत 2001 की
जनगणना के मुताबिक 23 फीसदी मिट्टी तेल अतिरिक्त एलाटमेंट किया था। लेकिन आदेश ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया और कालाबाजारियों के दबाव में उसे वापस ले लिया गया।
बैरिया तहसील क्षेत्र के कुल 177 सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानें हैं। जिसमें 155 दुकान ऐसी हैं, जहां खाद्यान्न के साथ मिट्टी तेल का वितरण किया जाता है। 22 ऐसी सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानें हैं जहां से केवल मिट्टी तेल वितरित किया जाता है। जिसमें वर्तमान में 14 दुकानें बंद चल रही हैं। इन सस्ते गल्ले की दुकानों पर मुरलीछपरा ब्लाक में 55,448 कार्डधारक हैं। जिसमें एपीएल, बीपीएल व अंत्योदय भी शामिल हैं। बैरिया ब्लाक में 52,714 कार्डधारक हैं। रेवती आंशिक में 12,665 कार्डधारक हैं। क्षेत्रीय लोगों की मानें तो पिछली बार जब उक्त राशन कार्ड बनाया गया तो भारी मात्रा में धांधली की गई। आलम यह रहा कि जिस ग्राम पंचायत में दो हजार राशन कार्डधारक होने चाहिए वहां एक हजार ही राशन कार्ड बनाए गए लेकिन जहां एक हजार राशनकार्ड होने चाहिए वहां 2000 कार्ड बनाए गए। इन्हीं राशन कार्डों पर मिट्टी तेल का आवंटन होता है। उस समय व तेल व खाद्यान्न माफियाओं ने राशनकार्ड एलामेंट में काफी हस्ताक्षेप किया और उनको सफलता भी मिली।
इस प्रकार की शिकायत पर जनवरी 2012 में प्रभारी जिलापूर्ति अधिकारी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव ने 2001 की जनगणना के मुताबिक 23 फीसदी की बढ़ोतरी कर एक कार्ड पांच यूनिट मान प्रति राशन कार्ड धारक करीब सवा तीन लीटर मिट्टी तेल का एलामेंट कर दिया। जिससे ग्रामपंचायतों में सस्ते गल्ले की सरकारी दुकानों पर सभी उपभोक्तओं को पर्याप्त मिट्टी तेल वितरण के लिए उठान शुरू हो गया।
डीएसओ की इस कार्रवाई से कालाबारियों को परेशानी होने लगी। क्योंकि जनसंख्या के आधार पर तेल का वितरण करने से पहले जिस मात्रा में तेल बचता था वह बचना बंद हो गया।
लोगों की मानें तो कलाबारियों के दबाव की वजह से जनवरी 2012 के एलाटमेंट को रद्द कर पहले की तरह मिट्टी तेल वितरण का आदेश कर दिया गया है। अब इस नए फरमान से जहां कुछ कोटेदार मालामाल होंगे तो अधिसंख्यकों को मिट्टी तेल वितरण में समस्या आ सकती है।
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