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लॉकअप बंदियों को पांच रुपए में ही चाय, नाश्ता और खाना!

Bahraich

Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
बहराइच। थाने और कोतवाली के लॉकअप में बंद अभियुक्त सिर्फ पांच रुपए में पेट भर रहे हैं। ये सुनने में भले अटपटा लगे लेकिन सच यही है। पांच रुपए में तो एक जून का नाश्ता भी मुश्किल है, ऐसे में लॉकअप के अपराधियों का पेट कैसे भरता होगा, अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। बंदियों के दो जून की रोटी का जुगाड़ भी पुलिस को जुगाड़ से करना पड़ता है। हालांकि, यह जुगाड़ कैसे होता है? इस मामले में अधिकारी बोलने से परहेज कर रहे हैं।
थाने में विभिन्न आरोपों में पकड़कर जो अपराधी लाए जाते हैं, उन्हें कम से कम 12 घंटे बिताना पड़ता है। ऐसे में इन अभियुक्तों के सुबह शाम के खाने और नाश्ते का प्रबंध पुलिस महकमे को करना पड़ता है। इसके लिए शासन से सिर्फ पांच रुपए का बजट ही थाने और कोतवाली को मिलता है। जनपद में कोतवाली नगर, देहात, नानपारा और मुर्तिहा समेत चार कोतवाली हैं। इसके अलावा रिसिया, नानपारा, रुपईडीहा, रामगांव, मोतीपुर, हरदी समेत 17 थाने हैं। शासन की ओर से थानों में बंद होने वाले अभियुक्तों के भोजन के लिए पांच रुपए का बजट निर्धारित है। शासन की ओर से की गई व्यवस्था पुलिस कर्मियों के लिए भी सिरदर्द बनी हुई है। अपराधों में पकड़कर थाने आने वाले इन बंदियों को भोजन और नाश्ते का प्रबंध करने के लिए भी थानेदारों को जुगाड़ करना पड़ता है। प्रतिदिन औसतन एक थाने में दो से तीन बंदी रहते हैं। ऐसे में शासन की ओर से खाने के लिए दिए जाने वाले खर्च की व्यवस्था से लॉकअप बंदियों का नाश्ता भी संभव नहीं हो पा रहा है। बाजार में एक कप प्याली चाय ही चार से पांच रुपए में मिलती है, नाश्ता और खाना तो दूर की बात है। एक थानाध्यक्ष ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लॉकअप में बंद होने वाले अभियुक्तों के खाने की व्यवस्था जेब से करने की मजबूरी होती है।
पुलिसकर्मियों के भोजन में लगता है हिस्सा
थाने में जो बंदी लॉकअप में बंद किए जाते हैं, उनका हिस्सा पुलिसकर्मियों के भोजन में ही लगता है। थाने के मेस में सिपाहियों के लिए जो खाना बनता है, कई थानों में वही खाना मजबूरी में बंदियों को परोसा जाता है।
अदालत भेजने को मिलते महज दो रुपए
थाने व कोतवाली में बंद होने वाले अभियुक्तों को अदालत भेजने के लिए महज दो रुपये यात्रा भत्ता दिया जाता है। ऐसे में दूरदराज से अभियुक्त अदालत में पेश करने के लिए आने वाले पुलिसकर्मियों को जेब से ही रकम खर्च करनी पड़ती है। मालूम हो कि जिला मुख्यालय से सुजौली, मिहींपुरवा, मुर्तिहा थानों की दूरी 100 किलोमीटर से अधिक है। ऐसे में किराया ही 50-60 रुपये हो जाता है।
नियमों को भी कर दिया जाता दरकिनार
लॉकअप में बंद होने वाले अभियुक्तों को बाहर का खाना न दिए जाने का स्पष्ट नियम है। पुलिस कर्मी ही उनके भोजन व नाश्ते की व्यवस्था करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसके बाद भी शासन की अड़चनों व कम बजट के चलते नियमों को दरकिनार कर परिजनों व अन्य लोगों को अभियुक्तों के भोजन और नाश्ता कराने के लिए छूट दे दी जाती है।
कई बार भेजा जा चुका पत्र
पुलिस अधीक्षक जीपी कनौजिया बताते हैं कि लॉकअप में बंद होने वाले अभियुक्तों के खाने के लिए दिए जाने वाले पैसे को बढ़ाए जाने के संबंध में मुख्यालय को कई बार पत्र भेजा जा चुका है। शासन की ओर से निर्णय लिए जाने का इंतजार है। पांच रुपए में भोजन व दो रुपये में अभियुक्तों को अदालत लाने में दुश्वारियों की बात एसपी भी स्वीकारते हैं। एसपी का कहना है कि कम बजट के बावजूद बेहतर व्यवस्था होती है। नियम व शर्तों को किसी भी थाने में शिथिल नहीं किया जाता है।
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