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पीएचसी से डॉक्टर नदारद, मरीज की मौत

Bahraich

Updated Tue, 04 Dec 2012 05:30 AM IST
बहराइच। रविवार को तहसील महसी क्षेत्र के सुरजना गांव से एक अस्थमा रोगी को इलाज के लिए आपातकालीन सेवा के माध्यम से तेजवापुर पीएचसी पर लाया गया लेकिन यहां मौके पर न तो कोई डॉक्टर मिला और न ही फार्मेसिस्ट। इलाज के इंतजार में रोगी करीब ढाई घंटे तक एंबुलेंस में ही पड़ा रहा। पीएचसी के कुछ कर्मी लगातार उसे जिला अस्पताल के लिए भगाते रहे। जब एंबुलेंस के कर्मियों को लगा कि रोगी को यहां इलाज नहीं मिल पाएगा तो वे रोगी को लेकर जिला अस्पताल आ रहे थे लेकिन रास्ते में ही रोगी ने दम तोड़ दिया।
तहसील महसी के सुरजना गांव निवासी रामसरन (55) अरसे से अस्थमा की चपेट में थे। रविवार की सुबह रामसरन की हालत अचानक बिगड़ गई जिस पर उसके पुत्र हुकुमचंद ने 108 पर कॉल कर आपातकालीन सेवा की सहायता से अपने पिता रामसरन को तेजवापुर पीएचसी पर पहुंचाया लेकिन यहां मौके पर कोई डॉक्टर नहीं मिला। मौके पर मौजूद एक स्वास्थ्य कर्मी ने थोड़ी देर में डॉक्टर के आने की बात कही। जिस पर एंबुलेंस के पायलट व टेक्नीशियन करीब ढाई घंटे तक डॉक्टर के इंतजार में खड़े रहे। इतने समय तक रोगी एंबुलेंस में ही तड़पता रहा। एंबुलेंस के कर्मी करीब ढाई घंटे से पीएचसी पर रोगी को भर्ती करने के लिए लोगों की मान मनौव्वल करते रहे लेकिन यहां एक चौकीदार के अलावा न तो कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही कोई फार्मेसिस्ट। रोगी की हालत जब ज्यादा बिगड़ने लगी तो एंबुलेंस के पायलट व टेक्नीशियन रोगी को लेकर जिला अस्पताल जाने लगे। लेकिन रास्ते में ही रामसरन ने दम तोड़ दिया।
होगी जांच, करेंगे सख्त कार्रवाई : सीएमओ
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरके टंडन ने कहा कि मामला अभी संज्ञान में नहीं आया है लेकिन अगर तेजवापुर पीएचसी के प्रभारी की ओर से ऐसी लापरवाही की गई है तो मामले की जांच करवाई जाएगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
सीएचसी व पीएचसी प्रभारियों को 24 घंटे मौजूद रहने के हैं आदेश
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. टंडन बताते हैं कि सीएचसी व पीएचसी के प्रभारियों को वहां 24 घंटे रहने के सख्त निर्देश हैं। यदि उन्हें किसी कारणवश बाहर जाना पड़े तो वे अपने स्थान पर किसी अन्य चिकित्सा अधिकारी को कार्य प्रभार सौंप कर ही जाएं जिससे रोगियों को चिकित्सकीय सुविधाएं मिलती रहें।
सीएचसी व पीएचसी से नहीं मिलता सहयोग
इमरजेंसी मैनेजमेंट इक्जीक्यूटिव अनिल कुमार बताते हैं कि जब उनके एंबुुलेंस के पायलट व टेक्नीशियन रोगी को पीएचसी व सीएचसी पर ले जाते हैं तो वहां के प्रभारियों से सहयोग नहीं मिलता है। डॉक्टर रोगी की स्थिति को बिना देखे ही मामला टाल देते हैं। इससे कई बार रोगी की हालत बिगड़ जाती है।
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