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हरियाणा की तरफ से पैमाइश शुरू

Baghpat

Updated Tue, 18 Dec 2012 05:30 AM IST
बागपत। यूपी-हरियाणा के बीच सोमवार को एक बार फिर सीमा विवाद सुलझाने की कोशिश प्रारंभ हो गई। इसके लिए हरियाणा के सोनीपत जनपद के राजस्व विभाग ने जमीन का 100 साल पुराना रिकार्ड निकाला है। इसे ध्यान में रखकर खादर में जमीन की पैमाइश प्रारंभ हुई है। इससे मालूम किया जा रहा है कि किस खेत पर किसका अधिकार है।
पैमाइश सोनीपत और बागपत जनपद के अधिकारियों की मौजूदगी में प्रारंभ हुई। भूमि का विवाद बागपत के निवाड़ा और सोनीपत के जाजल गांव के किसानों के बीच चल रहा है। वैसे इस समस्या की जद में सैकड़ों गांव आते हैं। इनमें बागपत के मुख्य रूप से टांडा, निनाना, नैथला, गौरीपुर और निवाड़ा गांव हैं। अगर निवाड़ा-जाजल का विवाद सुलझ जाता है तो बाकी के लिए भी पैमाइश का यही रास्ता अपनाया जा सकता है। सोमवार को हरियाणा की तरफ से पैमाइश शुरम कराई गई। इस दौरान दोनों ओर के किसान भी मौजूद रहे। इसमें पहले जाजल का रकबा देखा गया। इसके बाद निवाड़ा के रकबे की पैमाइश हुई। बागपत के सर्वेक्षण अधिकारी बाबूराम ने बताया कि पैमाइश से ही विवाद का हल किया जाएगा।


--। इस तरह से होगा समाधान
- यूपी-हरियाणा के गांवों का 100 साल पुराना राजस्व रिकार्ड देखा जा रहा है। इससे पता चल जाएगा कि किस गांव का कुल कितना रकबा है।
- पैमाइश से यह साफ हो जाएगा कि गांवों का रकबा बढ़ा है या घटा है। अगर अंतर आया है तो वह जमीन नदी के किस ओर है।
- जहां का रकबा बढ़ा मिलेगा, साफ हो जाएगा कि वहां दूसरी ओर की जमीन पर कब्जा किया गया है। राजस्व रिकार्ड से पता चल जाएगा कि यह जमीन कितनी है।
- विवाद का हल निकालने के लिए दीक्षित अवार्ड भी देखा जा रहा है। इसमें दोनों राज्यों की सीमा पर पिलर लगवाए गए थे। तय हुआ था कि जमीन कहीं हो, मालिक नहीं बदलेगा।

खनन रुके तो बात बने
बागपत। सीमा विवाद का हल निकालने के लिए ना जाने कितनी बार पैमाइश और मीटिंग हो चुकीं लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। हर बार गेहूं की बुआई और कटाई के समय दोनों ओर के किसान आमने सामने होते हैं। कारण यह है कि यमुना की धारा लगातार बदल रही है। खनन माफिया अंधाधुंध खनन करा रहे हैं। जिधर से ज्यादा रेत निकाल लिया जाता है, नदी उधर की ओर ही बहने लगी है। इसी के चलते इधर की जमीन उधर और उधर की इधर आ जाती है। जब तक खनन नहीं रुकेगा, समस्या बनी रहेगी।
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