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गांगनौली में दिमागी बुखार से मरे बच्चे!

Baghpat

Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
बागपत। गांगनौली में एक के बाद एक छह बच्चों की मौत दिमागी बुखार से हुई थी। यह मानना है मौत के कारणों की जांच करने वाले डाक्टरों की टीम का। हालांकि यह रिपोर्ट सिरम टेस्ट की नहीं है, लेकिन मरने वाले बच्चों के लक्षणों के आधार पर रहस्मय बुखार को अब वायरल इंसेफ्लाइटिस माना जा रहा है। इस खतरे के मद्देनजर गांव में एंटी लार्वा स्प्रे और फॉगिंग के साथ साफ सफाई के लिए टीमें भेजी गईं हैं।
गांगनौली में चार बच्चे पहले मरे थे, दो की मौत तीन दिन पहले ही हुई है। इन दो बच्चों के ब्लड टेस्ट में न तो मलेरिया आया और न ही टाइफाइड। इनका उपचार करने वाले डाक्टरों ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को बताया कि इनके सिर में तेज दर्द हुआ और देखते ही देखते इनकी मौत हो गई। ये लक्षण दिमागी बुखार के हैं।
इस बारे में सीएमओ डा. जेपी शर्मा का कहना है कि गांगनौली में लक्षणों के आधार पर बच्चों की मौत की वजह वायरल इंसेफ्लाइटिस मानी जा रही है। इसकी गंभीरता को देखते हुए वैज्ञानिकों से जांच कराने के लिए शासन को लिखा गया है। इसके अलावा गांव में एंटी लार्वा का स्प्रेे कराया जा रहा है। फॉगिंग भी शुरू हो गई है। ग्राम पंचायत से बात करके कहा गया है कि जहां भी गंदगी जमा हो, वहां तत्काल सफाई कराई जाए।
-। क्या है वायरल इंसेफ्लाइटिस ?
यह ऐसा वायरस से होता है जो मष्तिष्क पर हमला करता है। इससे दिमाग में सूजन आ जाती है। इसमें मौत हो सकती है। इसमें से एक वायरस की पहचान बहुत पहले हुई थी, जो जापान से आया था। इसलिए उसे जैपनीज इंसेफेलाइटिस कहा जाता है।
--।। क्या है इस बुखार का उपचार ?
दिमागी बुखार में दिमाग की सूजन का उपचार किया जाता है। इसके अलावा शरीर में आने वाली अन्य जटिलताओं को दूर किया जाता है। इसके लिए संक्रमित बच्चे को स्पेशल वार्ड अथवा आईसीयू में रखा जाता है। बागपत के सरकारी अस्पतालों में इसके उपचार की व्यवस्था नहीं है।
--।। कहां से आई है ये बीमारी ?
पश्चिमी यूपी में दिमागी बुखार के केस सबसे पहले सहारनपुर में आए थे। इसके बाद मुजफ्फरनगर में यह बीमारी पहुंची। इसके चलते सात साल पहले व्यापक स्तर पर जैपनीज इंसेफ्लाइटिस का टीकाकरण अभियान भी चला। इसके बाद जैपनीज इंसेफ्लाइटिस के केस तो नहीं मिले, लेकिन वायरल इंसेफ्लाइटिस का कहर जारी है।
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