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105 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी की मृत्यु

Baghpat

Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
खेकड़ा। गांव घिटौरा निवासी स्वतंत्रता सेनानी रामलाल की 105 वर्ष की उम्र में लंबी बीमारी के बाद शनिवार को मृत्यु हो गई। वह आजाद हिंद फौज के सिपाही थे। सूचना मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी भी उनके आवास पहुंचे। सलामी देने के बाद उनके शव का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
बता दें कि खेकड़ा के गांव घिटौरा मेें 105 वर्षीय रामलाल आजाद हिंद फौज के सिपाही थे। वर्तमान में क्षेत्र में वह अकेले ही स्वतंत्रता सेनानी बचे थेे। रामलाल उर्फ भोलाराम पुत्र नत्थू सिंह बचपन से ही देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत थे। वह देश को आजाद कराने के लिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जंग लड़ रही नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ‘आजाद हिंद फौज’ में शामिल हुए थे। विभिन्न आंदोलनों में भाग लेकर उन्होंने अंग्रेजाें के खूब दांत खट्टे किए। इस दौरान वह कई बार विदेश भी गए तथा जेलों में भी बंद हुए। लाख परेशानियों के बावजूद भी उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी। देश को आजाद कराने में उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई। रामलाल पिछले कुछ दिनाें से सांस की बीमारी से पीड़ित थे। तीन दिन पूर्व उपचार के लिए उन्हें परिजनाें द्वारा दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां इलाज के दौरान शुक्रवार की देर रात उन्होेंने अंतिम सांस ली। शनिवार की दोपहर उनका शव गांव में उनके आवास पहुंचा। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पूरा गांव शोक में डूब गया। सूचना मिलते ही उप जिलाधिकारी बागपत प्रभुनाथ, पुलिस क्षेत्राधिकारी खेकड़ा राममिलाष त्रिपाठी, थानाध्यक्ष जीपी सिंह यादव, नायब तहसीलदार रामदयाल आदि गांव पहुंचे और शोक संतृप्त परिवार को सांत्वना दी। अधिकारियाें ने दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी के अंतिम दर्शन कर उनके शव पर पुष्प चढ़ाए। इसके साथ ही प्रशासन की ओर से गमगीन परिजनों को स्वतंत्रता सेनानी के अंतिम संस्कार के लिए पांच हजार रुपये दिए गए। इसके बाद गांव में शवयात्रा भी निकाली गई, जिसमें आसपास के ग्रामीण भी शामिल हुए। यात्रा के बाद शव को शमशान घाट ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया। मुखाग्नि उनके बडे़ पुत्र विजय सिंह ने दी।

भरा पूरा परिवार छोड़ गए
स्वतंत्रता सेनानी रामलाल की मृत्यु हो जाने के बाद अब क्षेत्र में अन्य कोई भी स्वतंत्रता सेनानी नहीं बचा है। रामलाल अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में उनकी पत्नी केला देवी, पांच पुत्रों में विजय सिंह, रणसिंह, राजू, धर्म सिंह, बीरसिंह समेत एक दर्जन पौत्र-पौत्री हैं।
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