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सुरक्षित रेल सफर, ये सच नहीं

Baghpat

Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
बागपत। मैं लौटने के इरादे से ही जा रहा हूं मगर, सफर सफर है, मेरा इंतजार मत करना ... दिल्ली-सहारनपुर रेल मार्ग पर यात्रा करने का मतलब सचमुच जान और माल जोखिम में डालना हो गया है। कभी किसी मुसाफिर को दबंग चलती ट्रेन से धक्का दे देते हैं, कभी लुटेरे कहर बरपाते हैं। फिर भी आम आदमी की मजबूरी है कि उसे इन खतरे की ट्रेन से ही सफर करना है। एक तो बस के मुकाबले ट्रेन से चलना सस्ता है, दूसरा, सड़क पर गड्ढे बहुत हैं, तीसरा समय कम लगता है। इस रूट पर ऐसे मुसाफिरों की संख्या ज्यादा है जो बिना टिकट के चलते हैं।
इन सहूलियतों के चलते ही ट्रेनें फुल हैं। डब्बों में मुसाफिर भूसे की तरह भरते हैं। जितने अंदर होते हैं, उतने ही बाहर लटके रहते हैं। छत पर भी यात्री कम नहीं होते। ये खड़े होकर भी चलते हैं।
सुबह को दिल्ली की ओर जब ट्रेन जाती है तो नौकरी-पेशा के साथ हजारों दूधिये भी चलते हैं। दूधिए ट्रेन में मनमानी भी करते हैं। शाम को जब ट्रेन दिल्ली से वापस आती है तो लूट का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। बडौ़त से निकलते ही लुटेरों के गैंग टूट पड़ते हैं। शायद ही ऐसा कोई सप्ताह गुजरता हो, जब वारदात नहीं होती। लुट पिटकर भी मुसाफिर ट्रेन नहीं छोड़ सकते। 12 अप और 12 ही डाउन गाड़ियां हैं इस रूट पर। एक लाख से ज्यादा मुसाफिर चलते हैं इनमें। पैसेंजर में अग्रवाल मंडी टटीरी से शामली तक का टिकट सिर्फ नौ रुपये हैं जबकि बस में 40 रुपये खर्च होते हैं।

--। सीन :1 - छत पर खड़े छात्र
बागपत। दिल्ली-ऋषिकेश पेसेन्जर ट्रेन में बड़का स्टेशन के पास 200 से ज्यादा छात्र छत पर खड़े थे। दो मिनट के लिए ट्रेन रुकी, इसमें भी युवक छत पर चढ़ने के लिए दौड़ रहे।
--। सीन : 2 - इंजन पर लगी भीड़
ट्रेन पूरी तरह ठसम ठस भरी थी। ना खिड़कियों पर जगह थी, ना छत पर। इस हाल को देखकर कुछ लोग इंजन पर ही जा चढ़े। ड्राइवर ने मना किया, लेकिन माने नहीं।
--। सीन : 3 - कभी रुकी-कभी चली
अग्रवाल मंडी टटीरी से बड़ौत के बीच आए रेलवे हाल्ट पर ट्रेन कभी चलती तो कभी चलते चलते रुक जाती। लोग चलती ट्रेन पर भी चढ़ रहे थे, यह देख गार्ड बार-बार ट्रेन रुकवा रहा था।
--। सीन - 4 : लड़कियों से छेड़छाड़
बड़ौत और शामली रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ थी। स्कूल की छात्राएं ट्रेन में सवार होना चाहती थी। कुछ मनचले उन्हें देख रहे थे। जैसे ही छात्रा चढ़ीं, ये छेड़छाड़ करने के लिए उनके पीछे पीछे चल दिए।
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