आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

रोजाना दम तोड़ रहीं पांच बेटियां

Baghpat

Updated Wed, 03 Oct 2012 12:00 PM IST
बागपत। - बहन बिन राखी नहीं, मां बिन लोरी नहीं
पत्नी बिन प्यार नहीं, बेटी बिन दुलार नहीं
और तू मुझे मिटाने चला है
जिसके बिना तेरा सरोकार नहीं
दिल को झकझोर देती हैं ये पंक्तियां, लेकिन सवाल ये है कि इनका असर कितनों पर और कितनी देर तक होगा? बागपत के लिए तो इससे बड़ा शायद कोई और सवाल ही नहीं। यहां कन्याएं सिर्फ कोख में कत्ल नहीं की जा रहीं। जन्म लेने के बाद भी बेटियों का जीना मुश्किल है। कन्या भ्रूण हत्या पर काम कर रहे एनजीओ के दावों पर यकीन करें तो यहां रोजाना छह साल तक की पांच बेटियों की जान जा रही है। 2005 से 2011 के बीच 11 हजार 117 बेटियां बेमौत ही मर गई।
ये आंकड़े 2011 की जनगणना में शिशु मृत्यु दर से लिए गए हैं। इनमें जन्म के बाद छह साल तक की बच्चियों की मृत्यु का उल्लेख है। उत्तर प्रदेश में 2005 से 2011 के बीच सात लाख 20 हजार 115 बच्चियों ने दम तोड़ा। इस दौरान बागपत में 11 हजार 117 बेटियों की जान गई। एक साल का औसत 1853 है। इस तरह रोजाना पांच बेटियों की जान जा रही है। इनमें ज्यादातर जन्म लेते ही मर गई। बुखार ने भी कम कहर नहीं तोड़ा। ये आंकड़े तैयार करने के लिए 2005 में जन्म लेने वाली बच्चियों की संख्या में से 2011 में छह साल तक की बेटियों की संख्या को घटा दिया गया है। सहारनपुर में रोजाना औसतन आठ, मुजफ्फरनगर में 14, बिजनौर में 10, गाजियाबाद में 16, मेरठ में 12, मुरादाबाद में सात, गौतमबुद्धनगर में छह, बुलंदशहर में 14, अलीगढ़ में 10 लड़कियां इसी तरह गुम हो रही हैं? ये आंकड़े बागपत में कन्या भ्रूण हत्या और लगातार बिगड़ते लिंगानुपात पर काम कर रही संस्था नवोदय लोक चेतना कल्याण समिति, वात्सल्य, एक्शन एड और समर्थ फाउंडेशन की ओर से जारी किए गए हैं।

मार भी देते हैं बेटियों को
बागपत। सीएमओ डा. जेपी शर्मा का कहना है कि कन्याओं की सिर्फ भ्रूण हत्या नहीं होती। जन्म के बाद भी हत्या कर दी जाती है। इसके अलावा बेटों के मुकाबले बेटियों की सेहत पर कम ध्यान दिया जाता है।
सोच बदलनी होगी
एनजीओ एक्शन एड की प्रोग्राम कोआर्डिनेटर शिल्पी कहती हैं कि अभी भी काफी लोगों की यह सोच है कि वंश बेटों से ही चलता है, लड़की होगी तो दहेज देना होगा। जब तक यह मानसिकता नहीं बदलेगी, बेटियां सुरक्षित नहीं हो सकतीं।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

क्या ये गाने आपको पुराने दौर में ले जाते हैं, सुनकर कीजिए तय

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

उपन्यासकार वेद प्रकाश शर्मा की ये कहानी आपके दिल को छू जाएगी

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

हर उभरती हीरोइन को कंगना से सीखनी चाहिए ये 6 बातें, सफलता चूमेगी कदम

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

WhatsApp लाया अब तक का सबसे शानदार फीचर, आपने आजमाया क्या ?

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

बेसमेंट के वास्तु दोष को ऐसे करें दूर

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

Most Read

काशी की महिला ज्योतिषियों ने बताया यूपी चुनाव का परिणाम

femal astrologers from kashi tell about result of up electionp
  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

पांच दिन बंद रहेंगे बैंक

Banks closed five days
  • गुरुवार, 16 फरवरी 2017
  • +

यूपी चुनाव 2017 : एक गांव में एक वोट पड़ा दूसरे में एक भी नहीं, कारण जानकर रह जाएंगे हैरान

vilagers  voting boycott in kanpur
  • रविवार, 19 फरवरी 2017
  • +

भितरघात की चिंगारी से झुलसती सपा

spark of sabotage scorched SP
  • मंगलवार, 21 फरवरी 2017
  • +

खुशखबरी : 15 अप्रैल से यहां हाेगी सेना रैली भर्ती, 13 जिलाें के अभ्यर्थी अभी करें अावेदन

sena bharti rally in kanpur
  • मंगलवार, 21 फरवरी 2017
  • +

IPL-10 में धूम मचाने को तैयार यूपी के ये 10 खिलाड़ी

ten players from up select in ipl
  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top