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घाघरा लाल निशान से ऊपर,प्रशासन खामोश

Azamgarh

Updated Sun, 05 Aug 2012 12:00 PM IST
लाटघाट। सगड़ी तहसील में उफनाई घाघरा नदी से भले ही महुला-गढ़वल बांध के उत्तर में बसे 124 गांवों के ग्रामीणों की रात की नींद और दिन का चैन गायब हो गया हो,लेकिन तहसील प्रशासन बाढ़ से किसी तरह का खतरा मानने का तैयार नहीं है। जबकि डिघिया गेज पर नदी की लालनिशान से 23 सेमी. ऊपर बह रही है। तहसील प्रशासन की नजर में अभी बचाव और राहत का सवाल ही नहीं उठता है। बदरहुआ गेज पर नदी का जल स्तर 10 सेमी. और बढ़ने का प्रशासन को इंतजार है। बदरहुआ गेज पर लाल निशान पार होने पर ही बचाव और राहत कार्य शुरू किया जा सकता है।
घाघरा नदी पिछले एक सप्ताह से रौद्र रूप अख्तियार किए हुए है। नदी के तीन गेजों पर प्रति दिन 10 से 15 सेमी. बढ़ाव दर्ज किया जा रहा है। शनिवार को डिघिया गेज पर नदी खतरे के निशान 70.40 सेमी. से 23 सेमी. ऊपर बहने पर दर्जनों गांवों का संपर्क मार्ग डूबा पड़ा है। बरदहुआ गेज पर 71.58 सेमी. पर बह रही है। जबकि उल्टहवा गेज पर 75.60 सेमी. पर बह रही है। चक्की, हाजीपुर, मानिकपुर, देवारा खास राजा के दर्जनों पुरवों का संपर्क मार्ग पिछले तीन दिनों से डूबा पड़ा है। लोग खुद की नाव से बाजार, कोर्ट कचहरी और स्कूल कालेज आ जा रहे हैं। आवागमन के लिए गांव के रास्ते डूब जाने से लोग अनहोनी घटनाओं से डरे और सहमे हुए हैं। इसके बाद भी तहसील प्रशासन बचाव और राहत के नाम पर चुप्पी साधे हुए है। एसडीएम सगड़ी रामनरेश पाठक ने बताया कि अभी बाढ़ से बचाव और राहत की स्थिति नहीं पैदा हुई है। गांव वालों के पास 50 नाव है, जिससे वे बाजार आ-जा रहे हैं। बदरहुआ गेज पर पानी अभी खतरे के निशान से 10 सेमी. नीचे है। ऐसे में अभी कोई खतरा नहीं है। बचाव और राहत कार्य शुरू करने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। बदरहुआ गेज पर नदी के खतरे के निशान से ऊपर जाने पर बचाव और राहत कार्य के रूप में खाद्यान्न का वितरण करने के साथ ही सरकारी नाव की व्यवस्था की जाएगी। हरैया और महराजगंज ब्लाक में 22 सरकारी नाव रिजर्व के रूप में रखी गई है।

संपर्क मार्ग डूबा,अनहोनी से आशंकित
लाटघाट। घाघरा की बाढ़ से चक्की समेत लगभग आधा दर्जन गांवों के दर्जनों पुरवों का संपर्क मार्ग पिछले तीन दिनों से डूबा पड़ा है। संपर्क मार्गों को डूब जाने से लोग अनहोनी घटनाओं को लेकर आशंकित हैं। विशेषकर बच्चों को लेकर वह बेहद चिंतित हैं। इसके बाद भी तहसील प्रशासन बचाव और राहत के नाम पर किसी तरह की पहल करने की जरूरत महसूस नहीं कर रहा है।
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