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तेरह लाख में ही नीलाम हो गया एंटिक कलेक्ट्रेट का मलबा

Azamgarh

Updated Thu, 26 Jul 2012 12:00 PM IST
आजमगढ़। आज के जमाने में एंटिक सामानों की काफी कद्र है, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तो पुराने सामानों का कोई मूल्य ही निर्धारित नहीं है। जितनी बोली लग जाए उतनी कम है, लेकिन जिले में अंग्रेजी हुकूमत के जमाने में 1830 ई. में तैयार किए गए कलेक्ट्रेट भवन को जर्जर बता कर बीते वर्ष ढहा दिया गया। सबसे मजे की बात तो यह कि लखौरी ईट और साखू, सागौन तथा भारी भरकम लोहे के गाडरों तैयार इस भवन के मलबे को मात्र तेरह लाख रुपये में नीलाम कर दिया गया। मौका मिले तो पीछे क्यूं रहें कि तर्ज पर कलेक्ट्रेट में मौजूद मिट्टी के ढूहे तक को ठेकेदार खोद कर उठा ले जाया गया। जबकि कलेक्ट्रेट में घुसने के लिए पांच सीढियों को चढ़ना पड़ता था।
कलेक्ट्रेट के नजारत में मौजूद रिकार्डों को देखने से उसके इतिहास की जानकारी होती है। अंग्रेजी हुकूमत में सन् 1830 में 3.323 एयर के रकबे में तैयार कलेक्ट्रेट भवन के निर्माण में उस समय कुल 67882 रुपये खर्च थे। 182 वर्ष पुरानी यह इमारत समय-समय पर रख रखाव के अभाव में थोड़ी बहुत जर्जर हुई थी। यूं कहना गलत नहीं होगा कि कलेक्ट्रेट का एक हिस्सा जर्जर हो गया था। जिला प्रशासन द्वारा वर्ष 2005 में कलेक्ट्रेट भवन के मरम्मत के लिए भेजे गए रिपोर्ट के बाद मरम्मत के लिए दो करोड़ 21 लाख रुपये स्वीकृत हुआ था। इस दौरान कलेक्ट्रेट के कुछ हिस्सों की मरम्मत भी हुई थी। लेकिन बाद में तत्कालीन जिलाधिकारी आरएन सिंह ने कलेक्ट्रट भवन को जर्जर घोषित कराकर उसको ढहाने का आदेश दिया। साथ ही नए कलेक्ट्रेट भवन का प्रस्ताव तैयार करवा दिया। इस क्रम में कलेक्ट्रेट पटल के सारे कार्यालय तीन अक्तूबर 2011 के मंडलायुक्त कार्यालय के पास बने सरकारी भवन में शिफ्ट कर दिया गया। 182 वर्ष पुराने भवन के मलबे की कीमत महज तेरह लाख रुपये आंक कर नीलाम कर दिया गया। इतना ही इसी धनराशि में कलेक्ट्रेट भवन को ऊंचा बनाने में योगदान रखने वाली मिट्टियों की भी नीलामी हो गई। जबकि आज के दौर में यदि उतनी मिट्टी पाटी जानी होगी तो लाखो रुपये खर्च होंगे। जबकि उक्त भवन की ईंट, गाडर, दरवाजा, लकड़ियां आदि महज तेरह लाख रुपये में ही नीलाम हो सकती थी। इतने पुराने और विशालकाय भवन के मलबे के इतनी कम रकम में नीलाम होने की बात किसी को पच नहीं रही। इसकी चरचा आज भी हो रही है। इस संबंध में जिलाधिकारी प्रांजल यादव से वार्ता करने पर उन्होंने बताया कि नीलामी के वक्त जिस ठेकेदार ने अधिक बोली लगाई, उसी को ठेका दे दिया गया होगा। वैसे जरूरत पड़ी तो इस मामले की जांच कराई जाएगी।
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