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घंटों करना पड़ता है डॉक्टर का इंतजार

Auraiya

Updated Fri, 10 Aug 2012 12:00 PM IST
मुरादगंज(औरैया)। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों को डॉक्टर का घंटो इंतजार करना पड़ता है। क्योंकि डॉक्टर यहां नहीं सैफई में रहते हैं। ऐसे में कोई इमरजेंसी हो जाए तो मरीजों को औरैया और अन्य शहरों का रुख करना पड़ता है। इस स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टरों के रात में रुकने की व्यवस्था भी है, बावजूद इसके यह अव्यवस्था बनी हुई है। गुरुवार को अमर उजाला प्रतिनिधि ने जब स्वास्थ्य केंद्र का जायजा लिया तो मरीजों का दर्द सामने आया।
दृश्य-1 सुबह 10 बजकर 20 मिनट
मुरादगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केेंद्र में डा. शैलेंद्र सिंह की नियुक्ति है। शासन के आदेश हैं कि डाक्टर समय से अस्पताल पहुंचें। लेकिप यहां डाक्टर की कुर्सी खाली पड़ी है। खोजबीन करने पर पता चला कि डाक्टर सैफई के रहने वाले हैं। वह 11 बजे के बाद ही आ पाते हैं।
दृश्य-2 समय : 11 बजकर 10 मिनट
दो दर्जन मरीज डाक्टर साहब की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सेंगनपुठ्ठा निवासी रामगोपाल, भासौन निवासी सूबेदार सिंह, तुर्कीपुर निवासी मनोज आदि ने बताया कि वह बुखार खांसी जैसी मौसमी बीमारियों से पीड़ित हैं और डाक्टर साहब के इंतजार में बैठे हैं।
इनसेट
एएनएम केंद्र भी नहीं हुआ शुरू
क्षेत्र के दलेलनगर, सेंगनपुट्ठा, जलूपुर, कस्बा जाना, कोठी, भीखेपुर, सलैया, पुर्वाडोरी, फतेहपुर, करमपुर, हसुलिया, प्रेमनगर, गंाधीनगर, रोशंगपुर, चौकी, जगतपुर सहित दो दर्जन गांवों और मजरों के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं देने की जिम्मदारी मुरादगंज स्वास्थ्य केंद्र पर है। इसके बाद भी यहां एएनएम कक्ष आज तक नहीं बन सका है। प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को औरैया और अजीतमल जाना पड़ता है। स्वास्थ्य केंद्र परिसर में रात में रुकने के लिए आवास, लाइट एवं पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था है। इसके बाद भी कोई अधिकारी कर्मचारी यहां नहीं रुकता। इमरजेंसी में मरीजों का औरैया ही जाना पड़ता है।

व्यवस्थाएं सुधारी जाएं
क्षेत्रीय नागरिकों विश्वनाथ सिंह पाल, रामदत्त द्विवेदी, शिवलखन दुबे, राजकुमार सविता, मुस्तकीम, मुन्ना खां आदि ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से औचक निरीक्षण कर केंद्र की व्यवस्थाओं में सुधार कराए जाने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि पूर्व में यहां डा. अरविंद भूषण की तैनाती के समय प्रतिदिन 150 से 200 मरीज आते थे। अब मरीजों की संख्या घटकर 50 से भी कम रह गई है।
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