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सेंगर नदी पर भी मंडराने लगी गंदगी और प्रदूषण की काली छाया

Auraiya

Updated Fri, 15 Jun 2012 12:00 PM IST
मुरादगंज (औरैया)। यह लघु सरिता का बहता जल, कितना शीतल कितना निर्मल। किसी रचनाकार ने यह पंक्तियां गांवों के लिए जीवन दायिनी बनी नदियों के बारे में लिखी। परंतु अर्थलोलुपता ने नदियों के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है। गंगा, यमुना जैसी पावन नदियों की प्रदूषण से मुक्त रखने के लिए उठायी गई आवाज की गूंज तो पूरे देश में सुनाई देती है परंतु इन नदियों की आवाज गांवों गलियों से ही टकराकर वापस लौट आती है। हम बात कर रहे हैं सेंगर नदी की। सात जिलों की खेती किसानी के लिए जीवनदायिनी बनी सेंगर नदी आज अपना अस्तित्व खोती जा रही है। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह नदी भी विलुप्त होने श्रेणी में पहुंच जाएगी।
सेंगर नदी का उद्गम मथुरा जिले के नूह नाम झील से हुआ है। झील से निकलकर यह मथुरा, अलीगढ़, एटा, मैनपुरी, औरैया, रमाबाईनगर जिलों से होती हुई घाटमपुर के मूसानगर कस्बे के चोर सराह नामक स्थान पर यमुना नदी में गिरती है। इन सात जिलों की जीवन दायिनी धारा के नाम से भी सेंगर नदी को जाना जाता है। सेंगर नदी गंदगी और प्रदूषण की चपेट में आने और पुराने श्रोत बंद हो जाने से इसकी धारा थम सी गई है। बरसात के दिनों में छोटे छोटे पानी के श्रोत इस नदी में गिरते थे अब उनका कहीं अता पता नहीं है। ज्यादातर श्रोत विलुप्त हो गए हैं।
समाजसेवी कौशल किशोर पांडेय कहते हैं कि गंदगी के चलते पुराने श्रोत बंद हो गए हैं। यह नदी अब नहर के पानी पर आधारित होकर रह गई है। नदी के तट पर खड़े हरे भरे वृक्ष चंद पैसों के लालच में काट डाले गए। वहीं क्षेत्र की गंदगी भी नदियों में पड़ने लगी। पशुओं के शव भी लोगों ने नदी में डालने शुरू कर दिए। जिससे पूरी नदी प्रदूषित हो रही है। एनटीपीसी ने भी अवशिष्ट नाला इसमें छोड़ दिया है। जिससे सेंगर नदी की निर्मल धारा गंदगी में तब्दील हो चुकी है।
ऊंचा प्रधान विनोद कुशवाह का कहना है कि यह नदी बूढ़ी पड़रिया तक पूर्व की ओर और इसके बाद कुछ दूरी तक पश्चिम तक बही है।
पर्यावरणविद् पं. रामसेवक चौधरी बताते हैं कि नदियां देश की भाग्यरेखाएं हैं। देश की समृद्धि के लिए नदियों के किनारे खडे़ वृक्षों का कटान और उसमें खनन रोकना होगा। उन्होंने नदी के श्रोत खुलवाने तथा गंदगी साफ कराने के लिए विशेष अभियान चलाए जाने की मांग की।
प्रधान ककरैया जयनारायण तिवारी ने कहा कि नदियों के आसपास रहने वाले लोगों को भी जागरूक करने की जरूरत है।
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