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कैसे होगा लक्ष्य पूरा

Auraiya

Updated Sun, 09 Dec 2012 05:30 AM IST
औरैया। वर्ष 2012-13 की धान खरीद का लक्ष्य पाना अब आसान नहीं रह गया है। भारतीय खाद्य निगम की ओर से धान मिलों से लेवी रिजेक्ट करने से धान खरीद पर व्यापक असर पड़ा रहा है। हालत यह है कि मिल मालिकों ने सरकारी धान की खरीद बंद कर दी है। केंद्रों पर किसानों से खरीदा गए धान का अंबार लगा हुआ है। गोदाम ठसाठस भरते जा रहे हैं।
इस बार शासन से आए 12 हजार 400 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य पाने के लिए जिले भर में 22 केंद्र खोले गए हैं। गत एक अक्तूबर से जारी इन खरीद केंद्रों पर अब तक महज 2044.55 एमटी ही धान की खरीद ही की जा सकी है। मौजूदा समय में सरकारी धान का सीएमआर(कस्टम मिल चावल) को लेने के लिए भारतीय खाद्य निगम लेवी एजेंसी ने मिल मालिकों से इंकार किया है। इसके नतीजे गुजरने वाले समय के साथ बुरे होते जा रहे हैं। एफसीआइ की ओर से सीएमआर न लेने से मिल मालिकों ने धान की सरकारी खरीद करनी बंद कर दी है। इसका असर धान खरीद केंद्रों पर भी पड़ना शुरू हो गया है। हालत यह है कि मिलों पर सीएमआर तो सरकारी धान खरीद केंद्रों पर किसानों से खरीदे गए धान की लाट का अंबार लगा हुआ है। केंद्रों के गोदाम लगातार फुल होते जा रहे हैं। स्थिति पर नियंतण न हुआ तो दो एक दिनों में किसानों को सरकारी मूल्य पर धान बेचनी मुश्किल होने लगेगी।
इनसेट
डैमेज आ रहा सीएमआर

एफसीआई के क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर एसपी सिंह बघेल कहते हैं कि सीएमआर खरीदने के लिए अधिकतम तीन फीसदी डैमेज मान्य है। मिलों से आ रहे सीएमआर में 3.2 से लेकर 3.5 तक डैमेज आ रहा है। ऐसी स्थिति में मिलों से सीएमआर खरीदना मुश्किल है। समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
किसानों को समय से न हो सकेगा भुगतान
भारतीय खाद्य निगम की ओर से सीएमआर रिजेक्ट करने और उसे न लेने पर समाजवादी पार्टी के व्यापार प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष एवं पीएस राइस मिल के संचालक दीपू सिंह खासे नाराज हैं। कहते हैं कि सरकारी चावल का न लेने दुर्भाग्यपूर्ण है इसका प्रभाव किसानों पर भी पड़ेगा। इन दिनों मिलों पर सरकारी चावल की लाटें लगी हुई हैं और हर लाट में मिल मालिकों को 15 हजार का नुकसान हो रहा है।
ऐरिया मैनेजर को लिखा गया पत्र
सरकारी धान का लेवी की ओर से सीएमआर न लेने के सवाल पर खरीद प्रभारी/अपर जिलाधिकारी लालमणि मिश्रा ने बताया कि भारतीय खाद्य निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक कानपुर मंडल को पत्र भेजा है। इसमें डैमेज कंट्रोल की नीति में सुधार कर मिल मालिकों से सीएमआर खरीदे जाने को कहा गया है।
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