आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

स्वास्थ्य मंत्रियों के जिले में अस्पताल ही बीमार

AmbedkarNagar

Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
अंबेडकरनगर। स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में यह जिला चिराग तले अंधेरे वाली स्थिति से गुजर रहा है। यूं तो प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य विभाग के कैबिनेट व राज्य दोनों मंत्री इसी जिले से जुड़े हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं की दशा में कोई चमक नहीं दिख पा रही है। बदहाली का वही पुराना दौर अभी भी कायम है। जिला चिकित्सालय से लेकर सीएचसी तक में पुरुष व महिला चिकित्सकों का टोटा पड़ा है। जनरेटर तो सभी अस्पतालों में उपलब्ध हैं, लेकिन उसे चलाने की नौबत यदाकदा ही आती है।
अब कागजों में हो रही खपत का डीजल कौन पी रहा है, यह मरीजों की समझ से परे है। वार्डों में बेडों व साफ सफाई की दशा देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि स्वास्थ्य विभाग के दोनों मंत्रियों के गृह क्षेत्र का अस्पताल है। दवाओं की उपलब्धता के लाख दावों के बीच जमीनी हकीकत यही है कि अभी भी गरीबों को दवाओं के लिए मेडिकल स्टोर का रुख करना पड़ता है। जिला चिकित्सालय में ब्लड बैंक भवन दो वर्ष से बनकर तैयार है, लेकिन चालू होने की नौबत नहीं आ सकी है। बसखारी सीएचसी में कोई सफाई कर्मी नहीं है, तो वहीं जहांगीरगंज सीएचसी में एक्स-रे टेक्नीशियन न होने की वजह से एक्स-रे नहीं हो पा रहा है। जलालपुर में पैथालॉजी होने के बावजूद मरीजों को जांच प्राय: बाहर से करानी पड़ रही है। कटेहरी सीएचसी में जनरेटर व इनवर्टर दोनों बिगड़े पड़े हैं। लगभग सभी सीएचसी में मेडिकल व पैरामेडिकल स्टाफ के अधिकांश पद खाली चल रहे हैं। ऐसे में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने की मंशा तार तार हो रही है।
इससे बड़ी विडंबना शायद ही हो कि जिस जिले से स्वास्थ्य विभाग के दोनों मंत्री जुड़े हों, उस जिले में भी मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर लाभ न मिल पा रहा हो। इस कड़वे सच से ही इन दिनों जिले के मरीज व उनके तीमारदार जूझ रहे हैं। जिला चिकित्सालय जहां पर पूरे जिले के मरीजों को ढेरों उम्मीदें रहती हैं, वहां पर सुविधाओं का अकाल पड़ा है। सबसे अहम समस्या यह है कि यहां पर लगभग 2 वर्ष पूर्व ब्लड बैंक का भवन तो बनकर तैयार हो गया, लेकिन इसे चालू नहीं किया जा सका है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद यह भवन परेशान मरीजों को चिढ़ाने का ही काम कर रहा है। कई बार ऑपरेशन के दौरान खून की जरूरत महसूस होने पर मरीजों को रेफर करना पड़ता है। हालांकि वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में मेडिकल कॉलेज में शुरू हुई ब्लड बैंक यूनिट की तरफ तीमारदार रुख करते हैं, लेकिन अभी वहां व्यवस्था पूर्ण न होने के कारण कई बार मरीजों को निराश होना पड़ता है। बीते दिनों नयी सरकार के गठन के बाद अहमद हसन के स्वास्थ्य मंत्री व शंखलाल मांझी के स्वास्थ्य राज्यमंत्री बनने पर यह भरोसा बढ़ा कि शायद ब्लड बैंक चालू होने की दशा में सकारात्मक कदम बढ़े। हालांकि उम्मीदों के अनुरूप प्रयास नहीं हो पाया। या फिर यूं कहें कि इस तरफ मंत्रियों का ध्यान ही नहीं जा पाया। सच चाहे जो हो, लेकिन मरीजों के लिए ब्लड बैंक अभी भी सपना बना हुआ है।
और तो और जिला चिकित्सालय में पुरुष चिकित्सकों के 35 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से महज 18 पर ही चिकित्सक कार्यरत हैं। महिला चिकित्सकों के 11 पद के सापेक्ष सिर्फ 2 महिला चिकित्सक कार्यरत हैं। फार्मासिस्टों का पद तो भरा हुआ है, लेकिन सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को लेकर है। यहां 62 में से सिर्फ 10 पद पर ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कार्यरत हैं। हालांकि वैकल्पिक व्यवस्था चिकित्सालय प्रशासन करता आ रहा है, लेकिन स्थायी व्यवस्था की उम्मीद पिछले 7 माह के दौरान पूरी तरह चकनाचूर हुई है।
अस्पताल में ऑपरेशन कक्ष में सभी सुविधाएं मौजूद हैं। एक्स-रे मशीन भी ठीक से संचालित होती है, लेकिन अल्ट्रासाउंड कक्ष में ज्यादातर समय ताला ही बंद रहता है। वार्डों में साफ सफाई की दशा सबसे ज्यादा बदहाल है। वार्डों में प्रवेश करते ही दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। यूं तो चिकित्सालय में तीन जनरेटर हैं, लेकिन पूरी गर्मी मरीजों को बीते दिनों हाथ के पंखा का ही सहारा बना रहा। इतना ही नहीं एक्स-रे तक के लिए जनरेटर नहीं चलाया जाता। कई-कई घंटे मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। अक्सर इसे लेकर मरीज हंगामा भी करते हैं। हालांकि कागजों में यहां जनरेटर खूब चलता है। बदहाली का आलम यह कि जो पानी मरीजों को सप्लाई होता है, उसकी टंकी का ढक्कन टूट गया है। तरह-तरह की गंदगी टंकी से होकर जा रही है, लेकिन ध्यान देने की फुर्सत नहीं। तीमारदारों के लिए बने रैन बसेरे को भी नहीं खोला जा सका है। रैन बसेरे केे ऊपरी मंजिल पर अस्थायी कर्मचारियों ने कब्जा जमा लिया है। शुक्रवार को जिला चिकित्सालय में मिले मरीज रामनरायन पाल ने बताया कि अक्सर सभी दवाएं यहां नहीं मिल पातीं। कुछ दवाएं देकर बाहर से दवा लाने को लिख दिया जाता है। बरियावन से आयी महिला प्रभावती ने कहा कि बाबू जी गरीबों को दवा मुफ्त सिर्फ कहने के लिए है। ज्यादातर दवाएं तो बाहर से लेनी पड़ती हैं।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

health ministers

स्पॉटलाइट

आईफोन 6 पर मिल रही है 26,000 रुपये की छूट

  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

'बहन होगी तेरी' की रिलीज डेट आई सामने

  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

'सरकार 3' के लुक पर बोले बिग बी 'मजाक कर रहा हूं'

  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

खाने के बाद मीठे की तलब? कहीं बना ना दे आपको बीमार

  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

जियो फ्री में दे रहा है 100GB डाटा, करना होगा यह काम

  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

Most Read

यूपी डीजीपी का पद छोड़ते वक्त ये ट्वीट कर गए जावीद अहमद, आपने पढ़ा?

javeed ahmed tweets before leaving the post of UP dgp
  • शनिवार, 22 अप्रैल 2017
  • +

3 हजार ईंट लेकर पहुंचे मुस्लिम, बोले- बनाओ राममंदिर

muslims reach ayodhya with 3000 bricks for ram temple construction
  • शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017
  • +

योगी सरकार का गरीबों को एक और तोहफा, अब मई से दोगुना मिलेगा...

The Yogi Government's gift to the poor, now it will double in May ...
  • रविवार, 23 अप्रैल 2017
  • +

कृष्ण के युग में भी थी कैशलेस व्यवस्था, CM योगी ने दिया ‘सुबूत’

cm yogi promotes cashless system
  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

योगी सरकार का बड़ा फरमान, पुलिसवाले बताएं-कितनी संपत्ति है और कितना कैश?

Yogi Sarkar big action against corrupt policemen, stirred up the issue
  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

योगी सरकार ने की आजम खां की सुरक्षा में कटौती

 UP govt reviews security of leaders.
  • रविवार, 23 अप्रैल 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top