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134 बोरी सीमेंट ले जाने पर भड़के ग्रामीण, प्रदर्शन

AmbedkarNagar

Updated Wed, 05 Dec 2012 05:30 AM IST
जलालपुर (अंबेडकरनगर)। तहसील क्षेत्र में एक पुल लगभग ढाई करोड़ की लागत से लगभग बनकर तैयार है, लेकिन महज 10 लाख रुपये के कार्य के अभाव में वह सफेद हाथी बना हुआ है। खास बात यह कि पुल का निर्माण वर्ष 05 में शुरू हुआ था, लेकिन 7 वर्ष बीतने के बाद भी इसे आम जनता को समर्पित करने की नौबत नहीं आ सकी है। इसमें निर्माण इकाई राज्य सेतु निगम के अधिकारियों द्वारा बरती जाने वाली मनमानी से लेकर जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा मुख्य रूप से जिम्मेदार है। करोड़ों की लागत वाला यह पुल लंबे समय से स्थानीय ग्रामीणों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदार लोग आखिर कब चेतेंगे यह स्थानीय लोगों की समझ से परे है। इस बीच मंगलवार को अधूरे पड़े पुल निर्माण के बीच यहां रखी 134 बोरी सीमेंट निर्माण इकाई के लोगों द्वारा अन्यत्र ले जाये जाने पर भड़के ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया। निर्माण इकाई अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि पुल का निर्माण जल्द ही पूरा कराया जायेगा। इसके बाद ग्रामीणों का आक्रोश शांत हुआ।
जलालपुर तहसील क्षेत्र के भियांव ब्लॉक में मटही से चैनपुर गांव को आपस में जोड़ने के लिए मंधरपुर गांव में तमसा नदी पर वर्ष 2005 में पुल निर्माण का कार्य शुरू हुआ। पुल के बन जाने पर मटही के अलावा भीखपुर व भुजगी आदि गांव के सैकड़ों ग्रामीणों को ब्लॉक मुख्यालय जाने के लिए 10 से 12 किलोमीटर की दूरी कम हो जायेगी। बंदीपुर बाजार से सीधे जुड़ जाने के चलते ही यहां पुल निर्माण की मांग ग्रामीण लगातार करते चले आ रहे थे। 2005 में निर्माण शुरू होने पर ग्रामीणों की उम्मीदें परवान चढ़ीं। उन्हें लगा कि एक-डेढ़ वर्ष में यह पुल बनकर तैयार हो जायेगा। यह बात अलग है कि उनकी उम्मीदों पर जबर्दस्त वज्रपात हुआ है। शासन ने निर्माण का जिम्मा निर्माण इकाई राज्य सेतु निगम को सौंपा। कार्य शुरू हुआ, लेकिन इसे समय से पूरा नहीं किया जा सका। लागत की पूरी रकम 2 करोड़ 47 लाख रुपये निर्गत की जा चुकी है, लेकिन अब तक पुल आवागमन लायक तैयार नहीं हो पाया।
यहां पुल की छत ढाली जा चुकी है। दोनों तरफ रेलिंग भी बना दी गयी है। एक तरफ पुल तक पहुंच मार्ग भी बन गया है। सिर्फ दूसरे तरफ पुल का पहुंच मार्ग व पुल के ऊपर गिट्टी व सीमेंट मोरंग मिश्रण की एक कोट डाली जानी शेष है। विभागीय भाषा में इसे वियरिंग कोट कहते हैं। इस प्रक्रिया के चलते ही अभी यह पुल आवागमन लायक नहीं हो पाया है। दरअसल पुल की छत पर लोहे के एंगिल निकले हुए हैं, जो वियरिंग कोट की पकड़ मजबूत बनाने में सहायक होते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में महज 8 से 10 लाख रुपये खर्च होने हैं। सिर्फ इतनी रकम न मिल पाने के कारण ही यहां पुल का निर्माण निरर्थक बना हुआ है। इस मामूली रकम के चलते पुल का निर्माण बीते 3 माह से ठप पड़ा है। इसे लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों व निर्माण इकाई के अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी भी जताई, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इसी बीच मंगलवार को यहां रखी 134 बोरी सीमेंट ले जाने की भनक लगते ही ग्रामीण भड़क उठे। उन्होंने मौके पर पहुंचकर जमकर हंगामा किया, और ट्रैक्टर-टॉली के सामने खड़े हो गए। इससे काफी देर तक हंगामे का माहौल रहा। ग्रामीणों के मुताबिक यहां कई माह से कार्य ठप पड़ा है। विभागीय अधिकारी जल्द से जल्द कार्य शुरू कराने का आश्वासन देते हैं, लेकिन अब तक कार्य शुरू नहीं हो पाया है। पहले एक-एक कर यहां से कई मशीनें ले जायी गयीं, और अब चुपके से सीमेंट भी पार की जा रही है।
ग्रामीण सतीश, संतोष, श्यामलाल, रामभरत, शिवप्रसाद विश्वकर्मा, रवि, महेंद्र गौड़, बलजीत, वीरेंद्र कुमार, ऋषिकेश व मोती आदि ने आरोप लगाया कि सेतु निगम के अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। वहीं ग्रामीणों द्वारा ट्रैक्टर-टॉली रोक लिए जाने की सूचना पर पहुंचे विभागीय अधिकारियों ने सीमेंट खराब होने की संभावना को देखते हुए इसे दूसरे निर्माण स्थल बहोरिकपुर भेजे जाने की दलील दी, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। इस पर उन्होंने जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा कराने का आश्वासन देकर उन्हें शांत कराया।
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