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करोड़ों खर्च के बाद भी उम्मीदें तार-तार

AmbedkarNagar

Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। करोड़ों खर्च के बाद भी जिला मुख्यालय स्थित एक मात्र खेल स्टेडियम युवाओं की उम्मीदों को तार-तार कर रहा है। जांच पर जांच के सिवा और कोई उपलब्धि अब तक सामने नहीं आ सकी है। निर्माण में ढिलाई व धांधली के दोषी लोगों पर कार्रवाई की गयी होती तो शायद नतीजे कुछ और होते। हालांकि जांच की जिम्मेदारी के अलावा जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी इसके एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सके। ऐसे में बदहाल पड़ा स्टेडियम खिलाड़ियों के लिए निरर्थक बनकर रह गया है। जनपद गठन के बाद 4 मई 1997 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने जिला मुख्यालय पर खेल स्टेडियम के निर्माण के लिए शिलान्यास किया था। लगभग 4 वर्ष में यह स्टेडियम बनकर तैयार हुआ तो उस समय मुख्यमंत्री रहे राजनाथ सिंह ने 26 दिसंबर 2001 को इसका लोकार्पण किया। स्टेडियम में कार्यालय व चेंज रूम के अलावा सिर्फ मैदान ही था। बाद में मायावती फिर से सत्ता में आयीं, तो उन्होंने 30 अक्तूबर 2002 को अपने अकबरपुर दौरे के समय न सिर्फ स्टेडियम का नामकरण वीर एकलव्य के नाम पर किया, वरन यहां जूडो हॉल, वेट लिफ्टिंग हॉल, स्वीमिंग पुल व डारमेट्रीका निर्माण कराये जाने की घोषणा की। यह निर्माण कई वर्ष से हो रहा है, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो पाया है। इससे न सिर्फ खेल प्रतिभाएं विभिन्न सुविधा से वंचित हैं, वरन सरकार पर आर्थिक भार भी बढ़ा है। कारण यह कि सभी परियोजनाओं की लागत काफी हद तक बढ़ गयी। जूडो हॉल की प्रारंभिक लागत 1 करोड़ 73 लाख 76 हजार रुपये थी जो अब बढ़कर 2 करोड़ 22 लाख 52 हजार हो चुकी है। वेट लिफ्टिंग हॉल की लागत भी 1 करोड़ 6 लाख 55 हजार से बढ़कर 1 करोड़ 47 लाख 59 हजार तो वहीं तरणताल की लागत 2 करोड़ 24 लाख 97 हजार से बढ़कर 2 करोड़ 71 लाख 70 हजार हो गयी है। डारमेट्री की जो शुरुआती लागत 55 लाख 68 हजार थी वह अब 77 लाख 71 हजार पर जाकर टिकी।
पुनरीक्षित लागत का भुगतान भी शासन से हो चुका है, लेकिन निर्माण अधर में लटका है। डारमेट्री का निर्माण कार्यदायी संस्था पैक्सफेड द्वारा पूर्ण बताया जाता है, लेकिन विद्युत कनेक्शन नहीं हुआ है। कई कमरों की खिड़कियां नदारद हैं। जूडो हॉल तक पहुंच मार्ग नहीं बना है। तरण ताल व वेट लिफ्टिंग हॉल का निर्माण भी सिर्फ 80 प्रतिशत ही पूरा हुआ है। इसे लेकर अब तक आधा दर्जन से अधिक जांच हो चुकी है, लेकिन प्रत्यक्ष नतीजा सामने नही आ सका। जांच के नाम पर कई अन्य गतिविधियां तो संपन्न हो गयीं, लेकिन खिलाड़ियों के हिस्से कुछ नहीं आया। उन्हें सिर्फ और सिर्फ निराशा हाथ लगी है।
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