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450 स्कूलों में नहीं बंट रहा एमडीएम

AmbedkarNagar

Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। शिक्षासत्र शुरू हुए दो माह बीत चुके हैं लेकिन जिले के 450 विद्यालयों में एमडीएम योजनाएं ठप पड़ी हैं। कहीं रसोइया का विवाद चल रहा है तो कहीं प्रधानों का सहयोग नहीं मिल रहा है। 37 विद्यालयों में अध्यापक न होने के चलते छात्र-छात्राओं को बगैर मध्याह्न भोजन किए ही विद्यालय से वापस घर जाना पड़ रहा है।
दरअसल जिले में एमडीएम योजना पटरी पर लाने के लिए न तो प्रशासन गंभीर है और न ही विभागीय अधिकारी। उनकी उपेक्षा एवं लापरवाही का ही नतीजा है कि नया शिक्षा सत्र प्रारंभ हुए दो माह होने को हैं, लेकिन जिले में एमडीएम योजना का सुचारु लाभ छात्र-छात्राओं को नहीं मिल पा रहा है। नतीजा यह है कि इसका प्रतिकूल प्रभाव परिषदीय विद्यालयों में छात्र संख्या पर पड़ रहा है। विद्यालयों में पंजिका रजिस्टर पर छात्र-छात्राओं की संख्या अधिक दर्ज अवश्य होती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और होती है। जिन विद्यालयों में एमडीएम योजना के तहत चूल्हे ठंडे पड़े हैं, वहां बच्चों की संख्या आधे से भी कम होती है। ऐसे में सभी पढ़ें, सभी बढ़ें का नारा कहीं भी सच साबित होता नजर नहीं आ रहा है।
जनपद में कुल 1937 विद्यालयों में एमडीएम योजना संचालित है। इसमें 1281 प्राथमिक, 520 उच्च प्राथमिक, 62 सहायता प्राप्त उच्च प्राथमिक, 57 सहायता प्राप्त हाईस्कूल व इंटर कालेज, तीन राजकीय विद्यालय, 12 मदरसा व दो समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित विद्यालय शामिल हैं। इनमें से 450 विद्यालय ऐसे हैं, जहां इस वर्ष अभी तक योजना का लाभ बच्चों को नहीं मिल पाया है। इसमें 25 विद्यालय ऐसे हैं, जहां रसोइया चयन का विवाद चल रहा है। पांच विद्यालयों में संबंधित प्रधान के निधन के चलते भोजन नहीं बन रहा है। 26 विद्यालयों में ग्राम प्रधानों के असहयोग के चलते बच्चों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है, तो 357 विद्यालयों में कन्वर्जन कॉस्ट न होने के चलते चूल्हा ठप पड़ा है। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते 37 विद्यालयों में प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक की तैनाती नहीं हो सकी है। इसके चलते इन विद्यालयों में योजना के तहत भोजन नहीं बन रहा है। इसके अलावा जिन विद्यालयों में बन भी रहा है, उसमें अधिकांश में मीनू का ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
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