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लाखों गये पानी में, छात्र हैं न अध्यापक

AmbedkarNagar

Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। जिले में प्राथमिक शिक्षा की दशा पटरी पर आए भी तो कैसे? जिले में नौनिहालों का भविष्य संवारने के लिए शिक्षकों का टोटा पड़ा हुआ है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक ही 40 प्राथमिक व 10 उच्च प्राथमिक विद्यालय एकल शिक्षकों के भरोसे हैं। इतना ही नहीं, जिले के अधिकांश विद्यालयों में मानक के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती नहीं है। उस पर भी बड़ी मुश्किल यह कि तमाम प्रभावशाली शिक्षक शहरी क्षेत्रों या फिर उसके नजदीक विद्यालयों में ही बने रहना चाहते हैं। इससे भी विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या को लेकर असंतुलन की स्थिति लगातार बनी रहती है।
प्राथमिक शिक्षा की दिशा व दशा सुधारने के लिए भले ही तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। भवन निर्माण में लाखों रुपये पानी की तरह बहा दिए गए, लेकिन शिक्षकोें की कमी के चलते सब कुछ बेमानी नजर आता है। जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में नौनिहालों को शिक्षा देने के लिए कुल 1281 प्राथमिक व 520 उच्च प्राथमिक विद्यालय स्थापित हैं। इस वर्ष इन विद्यालयों में कितने बच्चों का दाखिला हो चुका है, यह आंकड़ा विभाग के पास नहीं है। कारण यह कि 30 सितंबर तक प्रवेश की प्रक्रिया चलनी है। हालांकि गत वर्ष के आंकड़ों पर ही गौर करें, तो प्राथमिक में 1 लाख 57 हजार 790 बच्चों ने प्रवेश लिया था। इनके सापेक्ष कुल 2,396 शिक्षक जिले में तैनात हैं। विभाग के पुराने मानक की बात की जाए, तो प्रति 40 बच्चों पर एक शिक्षक की तैनाती होती है। ऐसे में कुल शिक्षकों की संख्या 3,944 होनी चाहिए। नए शिक्षा के अधिकार अधिनियम की बात की जाए, तो प्राथमिक में प्रति 30 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए। इस मानक पर शिक्षकों की संख्या होनी चाहिए 5259, लेकिन जिले में तैनात हैं 2,396 प्राथमिक शिक्षक। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में गत वर्ष 43 हजार 594 बच्चों का नामांकन हुआ था। शिक्षकों की संख्या है 1387। इसमें मानकों के अनुसार शिक्षकों की संख्या ठीक है, लेकिन सबसे ज्यादा खराब स्थिति प्राथमिक विद्यालयों की है। हालत यह है कि 40 प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जो सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। 10 उच्च प्राथमिक विद्यालय भी एकल हैं। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि नौनिहालों की बेहतरी को लेकर विभाग व शासन कितना गंभीर है। पूर्व शिक्षाविद राजेंद्रनाथ ने कहा कि अन्य योजनाओं की बजाए सरकार शिक्षकों की संख्या बढ़ाने की तरफ ध्यान दे, तो ज्यादा बेहतर हो। सेवानिवृत्त शिक्षक कंतराज वर्मा ने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों में अनुशासन बनाने की तरफ भी ध्यान देने की जरूरत है।
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