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नौ एंबुलेंस तो दे दीं, चालकों की नहीं ली सुध

AmbedkarNagar

Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। जिले को नौ एंबुलेंस सेवाओं की सौगात तो मिल गई, इन्हें मिलाकर जिले में कुल 12 एंबुलेंस हो गईं। लेकिन इनके संचालन के लिए चालकों की व्यवस्था नहीं की गई। हालत यह है कि जिले में चालकों की भारी कमी है, लेकिन इसे दूर करने की सुध शायद विभाग और शासन को नहीं है। नई एंबुलेंस पर खानापूरी के लिए छोटे वाहनों पर तैनात नौ चालकों को तो फिलहाल लगा दिया गया है, लेकिन इस व्यवस्था से एंबुलेंस का सुचारु संचालन हो पाना कठिन नजर आता है। क्योंकि इन्हीं चालकों को विभाग के अन्य छोटे वाहन चलाने की जिम्मेदारी भी निभानी है। ऐसे में यदि चालकों का अतिरिक्त प्रबंध न किया गया, तो निश्चित तौर पर यह एंबुलेंस जिले में मरीजों के लिए सिर्फ छलावा बनकर रह जाएंगी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को लखनऊ से प्रदेश के विभिन्न जनपदों के लिए सरकारी एंबुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह पहले से तय था कि जिले को कुल नौ एंबुलेंस मिलनी है, इसलिए विभाग ने जिले में छोटे वाहनों पर तैनात नौ चालकों को एंबुलेंस लेने के लिए लखनऊ भेज दिया था। सभी एंबुलेंस सांय जिले में पहुंच भी गईं। इनका बढ़ चढ़कर स्वागत हुआ। सीएमओ ने बताया कि एक एंबुलेंस जिला मुख्यालय स्थित अकबरपुर पीएचसी पर रहेगी, जबकि आठ एंबुलेंस ब्लॉकों में स्थित आठ सामुदायिक केंद्रों पर उपलब्ध करा दी गई है। दावा किया कि इसका लाभ अब मरीजों को बड़े पैमाने पर मिलेगा। हालांकि ऐसा हो पाना अत्यंत कठिन नजर आता है। इसका प्रमुख कारण पर्याप्त संख्या में चालकों का न होना है। कारण यह है कि विभागीय उच्चाधिकारियों या शासन ने एंबुलेंस भेजने के साथ या फिर यह निर्णय करने के पहले चालकों का अतिरिक्त प्रबंध करने की तरफ ध्यान नहीं दिया। जिले के छोटे वाहनों के चालकों के बल पर जिले के मरीजों को एंबुलेंस सेवा का लाभ दिला पाना संभव नहीं है। इनमें से ज्यादातर चालकों को आवश्यक कार्य से विभाग के जीप व अन्य वाहन भी चलाने होंगे। उन परिस्थितियों में एंबुलेंस सेवा का लाभ निश्चित तौर पर मरीजों को नहीं मिल पाएगा। इतना ही नहीं, यदि किसी एंबुलेंस पर चालक मौजूद भी रहता है, तो वह लगातार सेवा देने की स्थिति में नहीं होगा। एक चालक रहने पर यह असुविधा सामने आएगी कि यदि वह चालक रात में किसी मरीज को फैजाबाद या लखनऊ पहुंचाकर वापस लौटेगा, तो तत्काल कोई नया मरीज आने पर दोबारा जाने की स्थिति में नहीं होगा। इन परिस्थितियों में निश्चित तौर पर प्रत्येक सीएचसी में कम से कम दो चालकों का प्रबंध करना ही होगा। जानकारों की माने तो 12 एंबुलेंस के हिसाब से कम से कम 24 चालक होने चाहिए। लेकिन ऐसी व्यवस्था नहीं है।
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