आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

मछली पालन में लागत कम और मुनाफा दोगुना

AmbedkarNagar

Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। जिले में मछली पालन किसानों के लिए आर्थिक लाभ का सबब साबित हो रहा है। नतीजा यह है कि मछली पालन के प्रति किसानों का मोह भी तेजी से बढ़ा है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि वर्ष में दो बार एक तालाब से मछलियां बिक्री के लिए प्राप्त की जा सकती हैं। ग्रामीणों की बढ़ती रुचि इसलिए भी है, क्योंकि जहां एक हेक्टेयर खेत में गन्ना, धान व गेहूं की फसल से किसानों को अधिकतम सवा लाख रुपये तक का लाभ मिलता है, वहीं इतनी ही भूमि में मछली पालन करने से लगभग ढाई लाख रुपये की आय की जा सकती है।
अंबेडकरनगर कृषि बाहुल्य जनपद के रूप में जाना जाता है। यहां मुख्यत: धान, गेहूं व गन्ने की खेती की जाती है। हालांकि इन फसलों की खेती व फिर उपज की बिक्री करने में किसानों को जिस प्रकार लगातार विभिन्न कठिनाइयों का सामना वर्ष दर वर्ष करना पड़ता है, उससे ग्रामीणों का ध्यान अन्य विकल्पों की तरफ तेजी से जा रहा है। पिपरमिंट व केला के साथ ही मछली पालन भी इसमें सर्व प्रमुख है। मछली पालन की तरफ बीते पांच वर्षों में ग्रामीणों का रुझान तेजी से बढ़ा है। मछली पालक अरुण वर्मा ने बताया कि मछली पालन में खेती की अपेक्षा दो गुना लाभ है। हालांकि विभिन्न रोगों से बचाव के लिए प्रशासन की तरफ से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता। इसका खामियाजा भी अक्सर किसानों को उठाना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद मछली पालन में यदि ध्यान दिया जाय तो यह फायदे का सौदा होता है। कहा कि एक हेक्टेयर भूमि में गन्ना, गेहूं व धान की फसल में किसानों को 90 हजार से अधिकतम सवा लाख रुपये का वार्षिक लाभ होता है। हालांकि इतनी ही भूमि में मछली पालन कर वार्षिक आमदनी ढाई लाख रुपये तक की जा सकती है। जलालपुर के मछली पालक नागेंद्र ने बताया कि मछली पालन करने से उनकी प्रगति में तेजी आयी है। बनगांव डिहवा के दिलीप कंहार ने बताया कि वे लगभग 6 वर्ष से मछली पालन कर रहे हैं। उन्हें कम मेहनत में अच्छी आमदनी मिल जाती है। कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति में मछली पालन से व्यापक सुधार हुआ है।
इन मछलियों का होता है पालन
जिले में मुख्यत: रोहू, सिल्वर, ग्रास, कामन, भाकुर व नैना मछलियों का पालन होता है। इसमें दो सौ रुपये में सिल्वर, ढाई सौ रुपये में ग्रास, ढाई सौ रुपये में कामन, डेढ़ सौ रुपये में रोहू, भाकुर व नैना मछलियों के एक हजार बच्चे मछली पालन के लिए उपलब्ध होते हैं। इसके लिए जिले में जगह-जगह हैचरी स्थापित हैं। खेमापुर स्थित हैचरी से जनपद के सभी प्रमुख बाजारों के अलावा सुल्तानपुर, आजमगढ़, गोंडा, फैजाबाद, बलरामपुर आदि जनपदों में मछलियां बिकती हैं।
क्या रखें सावधानियां
हैचरी मालिक अवनीश सिंह ने बताया कि मछली पालन के लिए तालाब के साफ सुथरा होने के अनिवार्यता होती है। बाहर का गंदा पानी कतई तालाब में न पहुंचने पाए इसका ध्यान रखा जाना चाहिए। तालाब में ताजा पानी उपलब्ध होने की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसान तनिक भी सजगता बरतें तो खेती की अपेक्षा मछली पालन में कहीं अधिक फायदा है।
जहर पड़ने पर बचाव के उपाय
किसानों को मछली पालन में सबसे ज्यादा मुश्किल तालाबों में जहर पड़ने को लेकर होती है। असल में जहर पड़ने के बाद पानी में आक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है और मछलियां दम तोड़ना शुरू कर देती हैं। इसमें सबसे ज्यादा जरूरत तत्काल पानी को बाहर निकालकर शुद्ध पानी भरे जाने की जरूरत होती है। इसके साथ ही आक्सी फ्लो नामक दवा का प्रयोग करना चाहिए। इससे मछलियों को सांस लेने में आसानी होती है।
रोग लगे तो यह करें
मछली की पूंछ पीछे की तरफ से सड़ने लगे तो तालाब में पौटैशियम या एक्वावेल्थ नामक दवा का छिड़काव करना चाहिए। मत्स्य निरीक्षक सीताराम ने बताया कि गुल्स नामक रोग के रोकथाम के लिए क्लीनर दवा का छिड़काव करना चाहिए। कहा कि सूखा रोग हो जाने पर मछली के जबड़े में घाव हो जाता है। इससे वे भोजन नहीं करतीं। बचाव के लिए गंदे पानी को निकालकर ताजे पानी में हल्के चूने का छिड़काव करना चाहिए।
25 दिन बाद होती है बिक्री
मछली का बच्चा पैदा करने के लिए मछली को हैचरी प्लांटों में वुडर प्लांट में रखा जाता है। खेमापुर प्लांट के अवनीश ने बताया कि एक घंटे ताजे पानी में आराम करने के बाद ग्लान नामक दवा को सुई के रूप में मछली को लगाया जाता है। चार घंटे बाद फिर वही दवा दी जाती है। इसके छ: घंटे बाद मछली अंडा देती है। अंडे के बाद मछली को बाहर निकालकर तालाब में पहुंचा दिया जाता है। अंडों को हैचरी प्लांट में रखा जाता है। 12 घंटे बाद अंडे से बच्चे निकलते हैं। 72 घंटे तक उनकी देखरेख के बाद मछली के बच्चे को भी तालाब में डाल दिया जाता है। 25 दिन के बाद यह बच्चे बिक्री के लिए तैयार हो जाते हैं। मत्स्य निरीक्षक के मुताबिक मछली को वर्ष में एक तालाब में दो बार डाला जा सकता है। हाईब्रिड की मछलियां लगभग पांच माह में ही बिक्री के लिए तैयार हो जाती हैं।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

दीपिका पादुकोण को मिला ये खास सम्मान

  • शुक्रवार, 24 मार्च 2017
  • +

लेक्सस ने भारत में लॉन्च की एक साथ तीन कार

  • शुक्रवार, 24 मार्च 2017
  • +

'अंगूरी भाभी' का आरोप, प्रोड्यूसर के पति ने की छेड़छाड़

  • शुक्रवार, 24 मार्च 2017
  • +

आपके बिजनेस को नुकसान से बचाएगा यह उपाय, आजमाकर देखें

  • शुक्रवार, 24 मार्च 2017
  • +

स्मार्टफोन से बेहतरीन फोटो खींचने के लिए जरूर पढ़ें ये टिप्स

  • शुक्रवार, 24 मार्च 2017
  • +

Most Read

योगीराज में सूबे की चर्चित जिलाधिकारी बी. चंद्रकला प्रतिनियुक्ति पर पहुंचीं दिल्ली

Yogiraj discussed the District Magistrate B. chandrakala Delhi reached deputation
  • शुक्रवार, 24 मार्च 2017
  • +

सीएम बनते ही याेगी ने लिया बड़ा फैसला, हांफने लगी यूपी की पुलिस

cm yogi adityanath first decision for up police
  • मंगलवार, 21 मार्च 2017
  • +

सीएम बनते ही सुपर एक्शन में योगी, युवाओं के लिए कर दिया ये बड़ा एेलान

cm yogi adityanath first action for youth
  • बुधवार, 22 मार्च 2017
  • +

कर्जमाफी की आस लगाए बैठे किसानों को लगा ‘जोर का झटका’

farmers are disturb after bank action
  • शुक्रवार, 24 मार्च 2017
  • +

यूपीः CM योगी से मिलने पहुंचीं मुलायम की बहू अपर्णा और बेटे प्रतीक यादव

Aparna Yadav and Prateek Yadav arrive at VVIP Guest House to meet CM Yogi Adityanath
  • शुक्रवार, 24 मार्च 2017
  • +

एक्‍शन मोड में योगी सरकार, बनारस के 15 थानों पर नए थानेदार

Yogi Sarkar in action mode, new SHO at 15 locations in varanasi
  • शुक्रवार, 24 मार्च 2017
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top