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शंकराचार्यों ने कहा, अशोभनीय आचरण

Allahabad

Updated Fri, 24 Jan 2014 05:44 AM IST
इलाहाबाद। जबलपुर में एक पत्रकार की ओर से मोदी के बारे में एक सवाल पूछे जाने के जवाब में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा उसे थप्पड़ मारे जाने पर मीडिया सहित शंकराचार्यों और संतों में जबर्दस्त आक्रोश है। सभी ने एक स्वर में घटना की निंदा करते हुए इसे उनके पद और गरिमा के प्रतिकूल बताया है।
शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा, उन्हें ऐसा न करते हुए संयम बरतना चाहिए था। संन्यासी किसी से मारपीट नहीं करते हैं। उनका यह कृत्य धर्म विरुद्ध है। आप किसी प्र्रश्न से सहमत हों या असहमत, उसका उत्तर सोच समझकर परंपरा और मंतव्य के अनुसार दें, थप्पड़ मारना अशोभनीय है।
शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा, ऐसा धर्माचार्य को शोभा नहीं देता है। यह संत का आचरण नहीं है, वे थप्पड़ नहीं मारते हैं। यह मीडिया के मौलिक अधिकारों का हनन भी है। वास्तव में यह सनातन धर्म पर थप्पड़ है क्योंकि उनके आचरण से इसकी प्रतिष्ठा को आघात लगा है। उन्हें किसी मानसिक चिकित्सालय में इलाज की जरूरत है।
निरंजनी अखाड़े के सचिव और मठ बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि यह कृत्य उनके पद की गरिमा के विरुद्ध है। हैरत की बात यह कि कांग्रेस के पुरोहित माने जाने और स्वयं राजनीति करने वाले शंकराचार्य, राजनीति के सवालों से असहज होते हैं। इससे संत समाज आहत है क्योंकि पद की गरिमा घटती है। यदि अस्वस्थ होकर वह अपना विवेक खो बैठे हों तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। टीकरमाफी आश्रम के स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी ने कहा, यह किसी आचार्य के लिए अशोभनीय है। धर्माचार्य के लिए ऐसा बर्ताव किसी भी तरह से उचित नहीं है। उनके पद का तो सभी आदर करते हैं।
शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ का कहना है कि स्वामी स्वरूपानंद वरिष्ठ शंकराचार्य हैं। उनकी अवस्था और उनके पद पर बैठा व्यक्ति आदरणीय है, यदि उन्होंने ऐसा कर भी दिया तो उसे उनका आशीर्वाद ही माना जाना चाहिए, उनका मंतव्य ऐसा नहीं होगा। वैसे मोदी की चर्चा ही ऐसी है, जिसे सुनकर असहज होना स्वाभाविक है। वहीं ‘अमर उजाला’ से बातचीत में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने सफाई दी कि न मेरा मोदी से कोई द्वेष है और न ही मीडिया से। मैंने तो स्वास्थ्य संबंधी कारणों से पास आ रहे पत्रकार को मात्र हटाने का प्रयास किया था।
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