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शिविर हटाया तो कुंभ में नहीं आएंगे शंकराचार्य

Allahabad

Updated Fri, 21 Dec 2012 05:30 AM IST
इलाहाबाद। कुंभ मेला प्रशासन को शंकराचार्यों के शिविर हटाने की तैयारी भारी पड़ सकती है। नाराज साधु संतों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने दो टूक कहा है कि कुंभ मेला क्षेत्र में यदि ‘शंकराचार्य चतुष्पद’ के कोनों पर स्थापित चारों पीठों के शंकराचार्यों के शिविरों को हटाया गया तो चारों ही पीठों के मूल शंकराचार्य मेले का बहिष्कार करेंगे। इतना ही नहीं उनके अनुयायी भी मेला क्षेत्र छोड़ने को विवश होंगे। पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के प्रतिनिधि रामकैलाश पांडेय और शृंगेरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी भारती तीर्थ के प्रतिनिधि रमणी शास्त्री ने भी इस घोषणा का समर्थन किया है। शंकराचार्यों के प्रतिनिधियों की इस घोषणा से अधिकारियों मे हड़कंप मचा है। बताया गया कि साधु संतों की नाराजगी का मामला लखनऊ तक पहुंच गया है और बातचीत के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को बुलाया गया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कुंभ मेला प्रशासन की उस टिप्पणी को अनुचित और अव्यवहारिक बताया है जिसके मुताबिक अर्धकुंभ की व्यवस्था के मुताबिक ही शंकराचार्यों को भूमि आवंटित करने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से पहले प्रशासन को अपनी सभी गतिविधियां, भूमि आवंटन और दूसरे कार्य अर्धकुंभ के मुताबिक करने होंगे। इसके तहत सबसे पहले मेला कार्यालय को ही वहां से हटाया जाना चाहिए क्योंकि अर्द्धकुंभ में मेला कार्यालय वहां नहीं था।
‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में उन्होंने कहा, ‘यदि शंकराचार्य चतुष्पद के कोनों पर भूमि आवंटन को मेला प्रशासन ‘मानवीय भूल’ मान रहा है तो उसकी सजा उसे स्वयं भुगतनी होगी, शंकराचार्यों को नहीं।’ उनका मानना है कि चतुष्पद की परिकल्पना का उद्देश्य एक ही जगह पर चारों पीठों के शकंराचार्यों की उपलब्धता थी ताकि दुनिया के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालु उनके दर्शन कर सकें। शुरुआत में मेला प्रशासन ने भी इसका समर्थन किया था और बाद में उसी के अनुसार भूमि बांटी गई थी। अब शिविरों के पूजन के बाद वहां से हटने का प्रस्ताव अनुचित और अव्यवहारिक है। उन्होंने कहा कि कोई भी अनुयायी नए प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगा।
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