आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

सड़क पर सोएंगे कल्पवासी!

Allahabad

Updated Fri, 14 Dec 2012 05:30 AM IST
इलाहाबाद। कुंभ के दौरान संगमनगरी पहुंचने वाले श्रद्धालु और कल्पवासी रहने की व्यवस्था करके ही घर से निकलें। हो सकता है कि आप इस भरोसे में कुंभ क्षेत्र पहुंच जाएं कि पहले की तरह तंबू तो मिल ही जाएगी लेकिन इस बार धोखा हो सकता है। संतों को खुश करने में जुटे मेला प्रशासन ने इस बार कल्पवासियों की जमीन में भारी कटौती कर दी है। पिछले मेला तक कल्पवासियों को मिलने वाली जमीन का बड़ा हिस्सा संतों को दे दिया गया जबकि कुछ जमीनों पर अब तक दलदल की स्थिति है। ऐसे में संभव है कि जिन पुरोहितों के आसरे तंबू मिल जाता थी, इस बार न मिल सके।
महाकुंभ में उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों मसलन, लखनऊ, कानपुर, एटा, इटावा, आगरा, मेरठ, बरेली, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी, चित्रकूट के साथ दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र से बड़े पैमाने पर श्रद्धालु पहुंचते हैं। पिछले कुंभ में प्रतिदिन स्नान को पहुंचने वालों के अलावा लगभग ढाई लाख ऐसे श्रद्धालु थे जो पूरे मेले के दौरान संगम की रेती पर तंबुओं में टिके थे। इनमें स्थानीय कल्पवासी 50 हजार से अधिक नहीं थे। बाकी दो लाख में ज्यादातर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब के थे। इस बार लगभग चार लाख कल्पवासियों के पहुंचने का अनुमान है लेकिन सुविधाएं कम हो गई हैं।
आधे कल्पवासियों के लिए तंबू का इंतजाम नहीं
जमीन को लेकर परेशानी जिस कदर बढ़ी है, वैसा कुंभ में पहली बार हुआ। जितनी जमीनें कट चुकी हैं, तय है कि लगभग आधे कल्पवासी तंबुओं की नगरी में बसने से वंचित रह जाएंगे। कल्पवासियों को मेला में बसाने वाली प्रयागवाल सभा एक-एक इंच जमीन के लिए संघर्ष कर रही है। सभा ने कई सेक्टरों की दलदली जमीन लेने से इनकार कर दिया है। हालत यह हो गई है कि अर्धकुंभ के मुकाबले इस बार जमीन का दायरा और सिमट गया है। ऐसे में देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जमीन मुहैया करा पाना बड़ी चुनौती होगा।
दोगुने हुए महामंडलेश्वर, संस्थाएं भी बढ़ीं
संगम नोज के सबसे करीब सेक्टर-4 में अखाड़ों और महामंडलेश्वरों को जगह दे दी गई है। इस बार महामंडलेश्वरों की संख्या दोगुनी हो गई है, सो उन्हें भी मेला क्षेत्र में जमीन मुहैया करानी है। तकरीबन 1800 नई संस्थाओं ने भी जमीन आवंटन के लिए आवेदन कर दिया है। मेला भले ही कल्पवासियों का होगा लेकिन मेला प्रशासन पूरी तरह से संतों और सत्ता के दबाव में है। साधुओं, संतों को खुश रखने के लिए उन्हें मांग के अनुरूप अतिरिक्त जमीन मुहैया कराई जा रही है। प्रयागवाल सभा को अब तक जमीन का आवंटन नहीं हुआ है जबकि मेला क्षेत्र में लगभग चार लाख कल्पवासियों को बसाने को जिम्मा प्रयागवाल सभा का ही है।
कल्पवासियों के लिए दलदल
प्रयागवाल सभा को अर्धकुंभ-2007 में तकरीबन 756 बीघा जमीन आवंटित की गई थी। मेला प्रशासन ने इस बार अर्धकुंभ के मुकाबले ज्यादा जमीन देने को तैयार तो है लेकिन जमीन का बड़ा हिस्सा दलदली है और वहां कल्पवासियों को नहीं बसाया जा सकता। अगर जमीन के उस दलदली हिस्से को अलग कर दिया जाए तो प्रयागवाल सभा के हिस्से में 700 बीघा जमीन ही आ रही है, जो चार लाख कल्पवासियों को बसाने के लिए नाकाफी है। इसके अलावा दूर-दराज के सेक्टरों में भी प्रयागवाल सभा ने तकरीबन 50 बीघा जमीन लेने से इनकार कर दिया है। ऐसे में अर्धकुंभ के मुकाबले इस बार 100 बीघा तक जमीन कम हो सकती है। अगर नई संस्थाओं और नए महांडेलश्वरों को भी जमीन बढ़ाकर दी गई तो हालात और बदतर हो जाएंगे।
पड़ोसी राज्यों से ज्यादा आती है भीड़
0 वैसे तो कुंभ मेला क्षेत्र में देश भर से कल्पवासी आकर बसते हैं लेकिन यूपी और इसके पड़ोसी राज्यों से कल्पवासियों की भीड़ ज्यादा आती है। 80 फीसदी कल्पवासी पश्चिमी यूपी, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश से आते हैं।
मेला सलाहकार समिति में भी उठा मुद्दा
0 कुंभ के लिए आपाधापी में मेला सलाहकार समिति का गठन किया गया और बृहस्पतिवार शाम इसकी आपात बैठक बुलाई गई। बैठक के दौरान कुंभ मेलाधिकारी मणि प्रसाद मिश्र ने कल्पवासियों को छोड़कर कुंभ और उससे जुड़े अन्य पहलुओं पर एक घंटे तक भाषण दिया। प्रयागवाल सभा के अध्यक्ष अजय कुमार पांडेय को यह बात नागवार लगी और उन्होंने बैठक के बीच में उठकर अपना विरोध दर्ज कराया। अजय पांडेय का कहना है कि मेला कल्पवासियों का है लेकिन मेला प्रशासन कल्पवासियों को ही भूल गया।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

23 साल की एरियाना ग्रांड के जस्टिन बीबर भी हैं दीवाने, आंतकी हमले में बाल-बाल बचीं

  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

कांस में दूसरे दिन अपने ग्लैमरस गोल्डन अवतार में नजर आईं सोनम कूपर

  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

कभी इस शख्स से होने वाली थी माधुरी की शादी, क्यों हो गईं रिजेक्ट ?

  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

जानिए शादी से एक रात पहले क्या सोचती हैं लड़कियां

  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

35 की उम्र के बाद नपुंसक बना सकता है इन चीजों का शौक, संभल कर खाएं

  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

Most Read

अल्पसंख्यकों का कोटा खत्म करने की बातें आधारहीन: यूपी सरकार

 UP govt to end minority quota
  • सोमवार, 22 मई 2017
  • +

उत्तर प्रदेश: बलिया में सपा नेता की गोली मारकर हत्या

UP: SP leader Sumer Singh shot dead by motorcycle borne miscreants in Ballia
  • सोमवार, 22 मई 2017
  • +

कश्मीरः क्रिकेट मैच के फाइनल में गूंजा पीओके का तराना, मैदान में लगे आतंकियों के पोस्टर

Kashmir: PoK anthem played before cricket match
  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

योगी सरकार ने बदला पेंशन योजना का नाम, अब मिलेंगे एक हजार रुपये

 UP govt to give 1000 rps under pension yojna.
  • सोमवार, 22 मई 2017
  • +

उन्नावः पटरी से उतरी लोकमान्य तिलक, जान बचाने को ट्रेन से कूदे यात्री

derail of lokmanya tilak in unnao
  • रविवार, 21 मई 2017
  • +

मीट कारोबारियों ने दी धमकी, स्लाटर हाउस चालू कराएं नहीं तो तोड़ देंगे कानून

UP Meat businessmen threaten, start slater house, otherwise break law
  • सोमवार, 22 मई 2017
  • +
Live-TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top