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नोबेल विजेता का पेपर भी हो गया था रिजेक्ट

Allahabad

Updated Mon, 10 Dec 2012 05:30 AM IST
इलाहाबाद। विश्वास करना आसान नहीं होगा लेकिन सच है। नोबेल पुरस्कार विजेता का रिसर्च पेपर भी एक समय रिजेक्ट कर दिया गया था। खास यह कि वह पेपर भी उस रिसर्च का हिस्सा था जिस पर बाद में नोबेल पुरस्कार मिला। यह सच्चाई है इंटीजर क्वांटम हाल इफेक्ट पर शोध के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाले जर्मनी के वैज्ञानिक प्रोफेसर के.क्लित्जिंग की। यह बातें स्वयं क्लित्जिंग ने बताईं।
ट्रिपलआईटी में शुरू सात दिवसीय विज्ञान समागम में रविवार को क्लित्जिंग ने बताया कि एक जरनल ने उस रिसर्च पेपर को छापने तक से मना कर दिया था। कुछ देर के लिए निराशा हुई लेकिन नई ऊर्जा और सोच के साथ फिर जुट गए। छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आगे बढ़ना है तो ऑब्जरवेशन बढ़ाना होगा। बाहर निकलना होगा। प्रोफेसर क्लित्जिंग की एनर्जी तथा बातों को समझाने के रोचक अंदाज के भी युवा वैज्ञानिक दिवाने दिखे। नोबेल पुरस्कार के रूप में मिले मेडल को जेब से निकालने का अंदाज तो काफी प्रभाव डालने वाला रहा। इसके जरिए उन्होंने संदेश दिया कि सबकुछ आपकी जेब में है, बस सही दिशा में प्रयास और लगन की जरूरत है। कहा कि एक आर्टिकल में छपा था कि क्या अगले 10 साल में भारत नोबेल पुरस्कार जीत सकेगा। अपील की कि इसके लिए युवाओं को आगे आना होगा। प्रयास होना चाहिए कि दो-साल में ही इस लक्ष्य को पाया जा सके। उन्होंने नाजी हमले के बाद जर्मनी से वैज्ञानिकों के पलायन के कठिन दौर की भी चर्चा की। गूगल के माध्यम से वे लैब भी दिखाए जहां उन्होंने रिसर्च किए हैं। नोबेल पुरस्कार विजेता ने बताया कि फार्मूला लिखी हुई उनकी टाई तथा नोटबुक जर्मनी के म्यूजियम में रखी है। चौधरी श्रवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर हिमाचल प्रदेश के डॉ. नागेश्वर सिंह के साथ आईं शोधार्थी केशानी, नताशा और एमएससी की छात्रा समीक्षा ने बताया कि प्रोफेसर क्लित्जिंग की बात कहने की आसान शैली बहुत प्रभावित करने वाली रही। यहां आना रोमांचित करने वाला है।
समारोह के अलग-अलग सत्रों को प्रोफेसर डीजी क्यूर सैयद हसनैन, इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स पुणे के पद्मविभूषण प्रोफेसर जयंत विष्णु नार्लिकर, एम. नार्लिकर, प्रोफेसर हरि एस. शर्मा, प्रोफेसर रामजी प्रसाद आदि ने भी संबोधित किया। इसी क्रम में वैज्ञानिकों ने संस्थान के मुख्य गेट का उद्घाटन भी किया।
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