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कर्मचारियों के लिए रेलवे ने बनाए ‘ताबूत’

Allahabad

Updated Wed, 28 Nov 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। रेल कर्मचारियों के आवास की समस्या सुलझाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं लेकिन फ्लैट के रूप में रेलवे ने ‘ताबूत’ बना दिए हैं। घनश्याम नगर में बने नए आवास की लालच में पुराना छोड़ चुके कर्मचारी अब पछता रहे हैं। कालोनी में तीन श्रेणियों के बने एक भी फ्लैट ऐसे नहीं हैं जिनमें कर्मचारी बिना मरम्मत कराए रह सकें। कई तो ऐसे हैं जिनमें आवंटन के पहले ही दरवाजे और खिड़कियां लटक गईं हैं। दीवारों के प्लास्टर उघड़कर गिर गए हैं। नींव के पास कई सेंटीमीटर चौड़ी दरारें दिख रही हैं। सभी आवासों में कर्मचारियों के पहुंचने के पहले ही कालोनी की सीवर लाइन ध्वस्त हो गई है।
रेलवे ने चौफटका के पास स्थित घनश्याम नगर में पुराने आवासों को तोड़कर टाईप-1 के 44, टाईप-2 के 20 और टाईप-3 के आठ फ्लैट बनाए हैं। तिमंजिला बने फ्लैट को देख रेलकर्मी आकर्षित हुए और आवंटन के लिए कतार लगा दी। नए आवास मिलें, इसके लिए कर्मचारी नेताओं से सिफारिशें लगवाईं। करीब छह महीने पहले बनकर पूरी तरह तैयार हुए फ्लैट्स में कर्मचारी पहुंचने लगे तो घटिया निर्माण की कलई भी खुलने लगी। फ्लैट संख्या 925-डी में पहुंचे एसी मैकेनिक सीवेश सरकार को पहले दो दिन बिना दरवाजा के रात काटनी पड़ी। दीवारों पर लगे मकड़ी के जाल को साफ करने के लिए झाड़ू मारते ही प्लास्टर गिर पड़े। खिड़कियों के कब्जे, शीशे टूटे हैं। वाश बेसिन में टोटियों की जगह लकड़ी के गुल्ले ठुके मिले। मरम्मत में उन्हें 12 हजार रुपए जेब से खर्च करने पड़े।
सीनियर टेक्नीशियन (एसी) पी. टोपो को 919-सी नंबर फ्लैट आवंटित है, लेकिन इसमें वायरिंग ही नहीं है। बिजली के आधे जंक्शन ध्वस्त हैं। फ्लैट में लैट्रिन, बाथरूम, रसोई, वाश बेसिन में एक भी टोटी नहीं है। फ्लैट की दीवारों कई गड्ढे हैं। कैरेज एंड वैगन के टेक्नीशियन संदीप सिंह के फ्लैट 922-सी की दीवारों और छतों के प्लास्टर पूरी तरह उखड़ गए हैं। सीलन से बदबू भी आने लगी है। यही स्थिति पूरी कालोनी की है। करीब दर्जनभर आवंटी ऐसे हैं जिन्होंने आवंटन के बाद भी फ्लैट पर कब्जा लेने से मना कर दिया। एनसीआरएमयू के संयुक्त मंडल मंत्री आरएन सिंह और शाखा मंत्री आरएन बनर्जी का कहना है कि घटिया निर्माण के कारण फ्लैट ताबूत की तरह लग रहे हैं। इनमें आने वाले कर्मचारी भयभीत हैं।
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