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दबा ली गईं सैकड़ों ‘दागी’ संस्थाओं की फाइलें

Allahabad

Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। पहले ‘दागी’ संस्थाओं की फाइलें तैयार की गईं और जब उन्हें सार्वजनिक करने की बात आई तो मेला प्रशासन ने ही फाइलें दबा कर रख ली। ऐसे सैकड़ों संस्थाएं हैं, जिन्हें पूर्व के कुंभ, अर्द्धकुंभ या माघ मेला में जमीन नहीं मिली लेकिन सुविधाएं आवंटित कर दी गईं। सैकड़ों संस्थाओं के गैर आबाद होने के बावजूद उन्हें जमीन आवंटित की गई। पिछले तमाम रिकार्डों का मिलान करने के बाद मेला प्रशासन ने ऐसी दागी संस्थाओं की सूची तो तैयार कर ली लेकिन अब उनके नाम सार्वजनिक करने से प्रशासन खुद ही कतरा रहा है। अगर नाम सार्वजनिक नहीं हुए तो इस महाकुंभ में घोटाले का ‘कुंभ’ भी लगेगा और घोटालेबाज साफ बच निकलेंगे।
मेला प्रशासन आखिर ऐसा क्यों और किसके दबाव में कर रहा है? दागी संस्थाओं को क्यों बचाया जा रहा है? इन तमाम सवालों ने मेला प्रशासन को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। शुरुआत में दावे किए जा रहे थे कि संस्थाओं को जमीन और सुविधाओं के आवंटन की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी लेकिन जैसे-जैसे आवंटन प्रक्रिया का वक्त नजदीक आता जा रहा है, प्रशासन के तमाम दावे हवा-हवाई साबित होने लगे हैं। दरअसल, कुंभ मेला के लिए संस्थाओं को जमीन आवंटन की आड़ में लंबा ‘खेल’ किए जाने की तैयारी है।
मेला प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक तकरीबन 3700 संस्थाओं को चिह्नित किया गया है, जिन्हें काफी पहले से मेला क्षेत्र में जमीन और सुविधाएं मिलती रही हैं। इनमें से तकरीबन 200 संस्थाएं ऐसी हैं, जिन्हें पिछले कई साल से कुंभ, अर्धकुंभ या माघमेला में जमीन नहीं मिली लेकिन लाखों रुपए की सुविधाएं दे दी गईं। ऐसे में सवाल यह कि जब संस्था जमीन पर थी ही नहीं तो सुविधाएं कौन ले गया? इसके अलावा चिह्नित की गईं साढ़े पांच सौ गैर आबाद संस्थाओं में साढ़े चार सौ संस्थाओं को जमीन आवंटित कर दी गई। अगर संस्थाएं गैर आबाद थीं तो जमीन आवंटन की सुविधा का लाभ किसे मिला? इससे यही साबित हो रहा है कि पूर्व में आयोजित कुंभ, अर्धकुंभ और माघमेला में संस्थाओं को जमीन और सुविधा आवंटन की आड़ में जमकर घपला किया गया। अफसरों और कर्मचारियों ने मनमाने तरीके से संस्थाओं को जमीन दी। इतना कुछ होने के बावजूद मेला प्रशासन ने दागी संस्थाओं के नाम अब तक ऑनलाइन नहीं किए हैं, जबकि मेला प्रशासन ने ही दावा किया था कि सभी संस्थाओं के नाम और उनकी स्थिति के बारे में पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। संस्थाओं को जमीन एवं सुविधा आवंटन की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है। अगर तब तक दागी संस्थाओं के नाम ऑन लाइन नहीं किए गए तो इस बार भी घोटालेबाज अपनी मंशा में सफल हो जाएंगे।
‘संस्थाओं के नाम ऑनलाइन किए जाएंगे। अभी सूची तैयार हो रही है। मेला शुरू होने से पहले ही संस्थाओं के बारे में पूरी जानकारी सार्वजनिक कर दी जाएगी।’
मणि प्रसाद मिश्र, कुंभ मेलाधिकारी
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