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एमएनएनआईटी छात्र की डेंगू से मौत, घेराव

Allahabad

Updated Thu, 01 Nov 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। डेंगू ने मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के बीटेक छात्र ललित प्रजापति की जान ले ली। छात्र चिल्लाते रहे लेकिन संस्थान के डॉक्टर नहीं माने कि वह डेंगू की चपेट में है। जब तक बात समझ में आती बहुत देर हो चुकी थी। फरीदाबाद से पहुंचे माता और पिता का रो रोकर हाल खराब था। परिजन सुबह ही शव ले गए। इस पूरी घटना से नाराज छात्र-छात्राओं ने संस्थान परिसर में जमकर हंगामा किया तथा निदेशक का घेराव किया। वे डॉक्टर को हटाने और पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की मांग कर रहे थे। निदेशक के आश्वासन के बाद ही छात्र हटे।
बीटेक अंतिम वर्ष कंप्यूटर साइंस का छात्र ललित दशहरा की छुट्टी के बाद 29 अक्तूबर को ही घर से आया था। उसकी घर से ही तबियत खराब थी लेकिन सेमेस्टर परीक्षाएं चल रही हैं, इसलिए आना पड़ा। उसने मंगलवार सुबह संस्थान की डिस्पेंसरी में दिखाया। साथ में आशंका भी जताई कि उसे डेंगू है, लेकिन डॉक्टर ने सामान्य तरीके से ही इलाज किया। शाम को तबियत बिगड़ने पर अन्य छात्र ललित को लेकर फिर डिस्पेंसरी पहुंचे जहां से उसे नाजरेथ अस्पताल रिफर कर दिया गया। वहां जांच में पता चला कि प्लेटलेट्स काफी कम हो गया है। छात्रों का आरोप है कि चार घंटे तक नाजरेथ में भी कोई सीनियर डॉक्टर ललित को देखने नहीं पहुंचा। रात में दो बजे के करीब छात्र की मौत हो गई। छात्रों ने रात में तबियत बिगड़ने पर ही घर पर सूचना दे दी थी। इसलिए पिता बिजेंद्र, माता मीरा, चाचा समेत अन्य परिजन बुधवार सुबह ही संस्थान पहुंच गए। बेटे का हाल जानने आए मां और पिता उसका शव देखकर बिलख पड़े। परिवार वाले सुबह ही शव लेकर फरीदाबाद लौट गए। डॉक्टरों की लापरवाही को लेकर परिवार वाले कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थे। छोटे भाई ऋषभ ने सिर्फ इतना ही कहा कि बाद में बात करेंगे।
छात्र-छात्राओं में डॉक्टरों की लापरवाही तथा संस्थान में चिकित्सीय सुविधा को लेकर काफी नाराजगी रही। सुबह 10 बजे तक सैकड़ों विद्यार्थी निदेशक कार्यालय पर डट गए थे। तकरीनब तीन घंटे तक घेराव चला। इस दौरान छात्र प्रतिनिधियों के साथ वार्ता में निदेशक ने संस्थान में यथासंभव चिकित्सीय सुविधा बढ़ाने, नए डॉक्टर की भर्ती करने, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने आदि का आश्वासन दिया। वार्ता में हर हास्टल में छात्र-छात्राओं की समस्याओं को लेकर संस्थान प्रशासन से वार्ता के लिए दो-दो छात्रों की कमेटी बनाने का भी निर्णय लिया गया। इन आश्वासनों तथा फैसलों के बाद छात्र मान गए।
‘इतनी जल्दी किसी डॉक्टर को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कहीं लापरवाही हुई है तो जांच कराई जाएगी। बिना जांच डॉक्टर भी डेंगू का इलाज शुरू नहीं कर सकते। संस्थान की डिस्पेंसरी में सुविधा की सीमा है। इसलिए छात्र को नाजरेथ ले जाने को कहा गया। उस अस्पताल से संस्थान का समझौता भी है। वहां यदि इलाज में लापरवाही हुई है तो आगे के संबंधों के बारे में सोचा जा सकता है। जहां तक पीड़ित परिवार वालों को मुआवजे की बात है तो इसके लिए संस्थान में कोई फंड नहीं होता। मिल जुलकर आर्थिक मदद के बारे में कोशिश की जाएगी।’
प्रोफेसर पी. चक्रवर्ती
निदेशक, एमएनएनआईटी
एमटेक का छात्र भी चपेट में
संस्थान में एमटेक का एक अन्य छात्र कामरान खान भी डेंगू की चपेट में हैं। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। उसे नाजरेथ में भर्ती कराया गया है। उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। कामरान भी सोमवार को बलरामपुर स्थित अपने घर से वापस लौटा है तथा पहले से ही बीमार है।
परीक्षाएं स्थगित, जताया शोक
बीटेक छात्र की मौत तथा विद्यार्थियों के प्रदर्शन के बाद एमएनएनआईटी में बुधवार की परीक्षाएं स्थगित कर दी गईं। अब यह परीक्षाएं शनिवार को होंगी। बृहस्पतिवार और शुक्रवार की परीक्षाएं पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार ही होंगी। संस्थान के एमपी हाल में शोक सभा कर छात्र को श्रद्धांजलि दी गई। संवेदना प्रकट करने वालों में निदेशक और रजिस्ट्रार समेत अनेक शिक्षक, अफसर तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल रहे।
ललित ने ब्लड देकर कइयों की बचाई जान
इलाहाबाद। यह भी कुदरत का अजब खेल है। कई लोगों को ब्लड देकर जान बचाने वाले ललित को खुद के लिए प्लेटलेट्स नहीं मिला। अस्पताल में साथी छात्र प्लेटलेट्स के लिए दौड़ लगाते रहे लेकिन असंवेदनशील व्यवस्था तथा होनी के आगे इनकी एक न चली। ललित प्रजापति दूसरों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहता था। उसका व्यवहार ऐसा था कि उससे मदद मांगने में छात्र-छात्राओं को कोई संकोच भी नहीं होता। रात-दिन किसी भी वक्त छात्र उसके पास पहुंच जाते। ललित के इस व्यवहार का अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि उसने कई बार रक्त दान भी किया। द्वितीय वर्ष में ललित का रूम पार्टनर रहे तौसिफ अहमद ने डबडबाई आंखों के साथ कहा, ‘वह पूरे संस्थान के छात्र-छात्राओं का अच्छा दोस्त था।’ तौफिक ने बताया, अभी हाल में वह ललित के घर भी गया था। परिवार में माता-पिता के अलावा दो और भाई हैं। सभी लोग दूसरों के लिए ही जीते हैं लेकिन आज उनके ऊपर ही ...।
ललित अपने कॅरियर को लेकर भी काफी गंभीर रहता था लेकिन जीवन में कुछ बेहतर की उसकी यही चाहत जान का दुश्मन बन गई। ललित को बंग्लुरू की एक कंपनी ‘आरकल’ में साढ़े सात लाख रुपये वार्षिक वेतन की नौकरी मिल गई थी। इसी के साथ बुधवार से परीक्षाएं भी शुरू हो गईं। परीक्षा में फेल होने पर नौकरी गवाने का खतरा था। इसलिए वह सोमवार को घर से वापस आ गया, जबकि उसकी पहले से काफी तबियत खराब थी। उसका यह कदम पूरे परिवार को आघात दे गया। इसको लेकर छात्र-छात्राओं में चर्चा रही कि उसने कॅरियर के लिए अपनी जान गवां दी।
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